मुंबई: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की आयात निर्भरता को कम करने और देश को खनिज संसाधनों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक “भूमिगत क्रांति” (Below-the-ground Revolution) का आह्वान किया है। अपनी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह भारत ने कृषि क्षेत्र में ‘जन आंदोलन’ के जरिए अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की, वैसी ही इच्छाशक्ति अब खनिज और हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज के लिए दिखाने का समय आ गया है।
अनिल अग्रवाल के विजन और सुझावों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- आयात पर लगाम और रोजगार सृजन: अग्रवाल ने उल्लेख किया कि वर्तमान में भारत का 50% आयात जमीन के नीचे वाले संसाधनों से जुड़ा है, जो दूसरे देशों में नौकरियां पैदा कर रहा है। उन्होंने अनुमान जताया कि इस क्षेत्र में क्रांति आने से देश के 30-40% युवाओं को करियर और आजीविका के बेहतरीन मौके मिल सकते हैं।
- नीतिगत लचीलापन और ‘लाइफ ऑफ माइन’ लीज: उन्होंने सरकार से अपनी पुरानी मानसिकता छोड़ने और नियमों में लचीलापन लाने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि खदानों के लिए मौजूदा 50 साल की फिक्स्ड लीज के बजाय दुनिया के अन्य देशों की तरह ‘लाइफ ऑफ माइन’ (जब तक संसाधन उपलब्ध हैं) की नीति अपनानी चाहिए।
- नवाचार और अन्वेषण (Exploration): अग्रवाल के अनुसार, ‘एक्सप्लोरेशन’ को एक राष्ट्रीय मिशन बनाया जाना चाहिए जिसमें आम लोग, स्टार्टअप्स और छोटी-बड़ी सभी कंपनियां शामिल हों। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण सुरक्षा से समझौता किए बिना केवल नीलामी जैसी प्रक्रियाओं तक सीमित रहने के बजाय मुख्य ध्यान उत्पादन में बढ़ोतरी पर होना चाहिए।
- भारत की जियोलॉजिकल क्षमता: उन्होंने भारत की जियोलॉजी को दुनिया में सबसे शानदार बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, उत्साही उद्यमियों और युवाओं की ताकत के दम पर भारत इस क्षमता को तेजी से विकसित कर सकता है।
अंत में, उन्होंने सभी हितधारकों से ‘मिशन मोड’ में एक साथ आने की अपील की ताकि इस भूमिगत क्रांति के जरिए देश की आर्थिक तस्वीर बदली जा सके और भारत की “गाढ़ी कमाई” का पैसा देश के विकास में ही खर्च हो।
