थिम्पू: भूटान की शाही सरकार और विश्व बैंक ने 1,125 मेगावाट की ‘दोरजीलुंग जलविद्युत परियोजना’ के लिए 515 मिलियन डॉलर के ऐतिहासिक वित्तीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना भूटान के कुल ऊर्जा उत्पादन में लगभग एक-तिहाई योगदान देगी और देश की अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और प्रभाव:
- ऊर्जा उत्पादन: पूर्वी भूटान में कुरीछू नदी पर स्थित यह परियोजना सालाना 4,500 GWh से अधिक स्वच्छ बिजली पैदा करेगी।
- आर्थिक विकास: इससे भूटान की जीडीपी में 2.4% की वृद्धि होने की उम्मीद है। अगले 30 वर्षों में भूटान करों, मुफ्त बिजली और लाभांश के माध्यम से लगभग 4 बिलियन डॉलर का राजस्व कमाएगा।
- क्षेत्रीय सहयोग: परियोजना के वार्षिक उत्पादन का लगभग 80% हिस्सा भारत को निर्यात किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- पर्यावरण: यह परियोजना सालाना 33 लाख टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी।
अभिनव फाइनेंसिंग मॉडल: लगभग 1.7 बिलियन डॉलर की कुल लागत वाली यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से विकसित की जा रही है। विश्व बैंक ने इसमें अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (IDA) से 300 मिलियन डॉलर और अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) से 215 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण प्रदान किया है। यह मॉडल भूटान के सरकारी ऋण को कम रखते हुए निजी क्षेत्र से अतिरिक्त 900 मिलियन डॉलर के निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
साझेदारी: इस परियोजना का क्रियान्वयन ‘दोरजीलुंग हाइड्रो पावर लिमिटेड’ (DHPL) द्वारा किया जाएगा, जिसमें भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (60%) और भारत की टाटा पावर (40%) की संयुक्त हिस्सेदारी है।
भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे ने इसे 13वीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य आधार बताया, जो स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ भूटान के ‘कार्बन-नेगेटिव’ रहने के संकल्प को और मजबूत करेगी। वहीं, टाटा पावर के सीईओ डॉ. प्रवीर सिन्हा ने इसे भारत-भूटान स्वच्छ ऊर्जा सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया。
