मुंबई: गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप के एवीपी और हेड (एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी), रामनाथ वैद्यनाथन ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और बदलती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी के भविष्य पर अपने विचार साझा किए हैं। उनके अनुसार, सस्टेनेबिलिटी अब केवल उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवसायों के लिए एक ‘नई वास्तविकता’ और अनुकूलन (Adaptation) का विषय बन गई है।
रामनाथ वैद्यनाथन के लेख की प्रमुख रणनीतिक झलकियाँ निम्नलिखित हैं:
- व्यावहारिक रिपोर्टिंग की ओर बदलाव: जटिल रिपोर्टिंग नियमों और आर्थिक मंदी के कारण कई कंपनियां अपनी ESG प्रतिबद्धताओं पर फिर से विचार कर रही हैं। इसे देखते हुए सेबी (SEBI) और यूरोपीय संघ जैसे नियामकों ने नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया है। भारत में BRSR कोर वैल्यू-चेन डिस्क्लोजर को 2026 तक स्वैच्छिक कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को तैयारी के लिए समय मिल सकेगा।
- अनुकूलन अब अनिवार्य: दुनिया भर में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़ और जंगलों की आग) को देखते हुए कंपनियां अब केवल उत्सर्जन कम करने के बजाय जलवायु जोखिमों के प्रबंधन और अनुकूलन रणनीतियों में निवेश कर रही हैं।
- जैव विविधता पर ध्यान: वैश्विक आर्थिक उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा प्रकृति पर निर्भर है। कंपनियां अब ‘टास्कफोर्स ऑन नेचर-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर’ (TNFD) के मानकों का उपयोग करके जैव विविधता पर अपने प्रभाव का आकलन कर रही हैं।
- ग्रीनवाशिंग पर लगाम: ‘ग्रीन दावों’ की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए अब सस्टेनेबिलिटी, कानूनी और ऑडिट टीमें मिलकर काम कर रही हैं। भविष्य में ‘ESG कंट्रोलर’ जैसे नए पद कॉर्पोरेट संरचना का सामान्य हिस्सा बन सकते हैं, जो डेटा की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।
- रणनीतिक निवेश: आर्थिक बाधाओं के बावजूद, कंपनियां उन पहलों पर अधिक ध्यान दे रही हैं जो सीधे उनके मुनाफे (bottom line) को प्रभावित करती हैं। सस्टेनेबिलिटी अब व्यावसायिक योजनाओं (Business Plans) का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
अंततः, 2026 का ट्रांजिशन उन कंपनियों के लिए अधिक सफल होगा जो सस्टेनेबिलिटी को केवल अनुपालन (Compliance) के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के खिलाफ एक मजबूत व्यावसायिक रणनीति के रूप में अपनाएंगी।
