- वित्तीय वर्ष 26 में ऋण में 500 मिलियन डॉलर की कटौती के बाद, वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में भी 1.1 बिलियन डॉलर की और गिरावट लाई
- ग्रुप की रीफाइनैंसिंग योजनाओं का असर अब साफ़ तौर पर दिखने लगा हैः लोन की लागत कम हो रही है, फाइनैंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ रही है; विकास एवं शेयरहोल्डर्स को रिटर्न देने के लिए कंपनी के पास ज़्यादा कैश है
मुंबई: डीमर्जर के बाद वेदांता ग्रुप की कंपनियां ज़्यादा मजबूत और स्वतंत्र बिज़नेस के रूप में उभर रही हैं। स्टॉक मार्केट से हटकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है और कंपनी रीफाइनैंसिंग के ज़रिए अपने ऋण को अनुकूलित कर रही है।
यह बदलाव और भी ज़्यादा मायने रखता है जब ऑपरेटिंग कंपनियाँ अपने-अपने इन्वेस्टमेन्ट सायकल पर ध्यान दे रही हैं और सभी बिज़नसेज़ में संचालन के मज़बूत परफोर्मेन्स और कैश जनरेशन से कंपनी को फायदा मिल रहा है।
इसका उदाहरण है- वेदांता एलुमिनियम मैटल लिमिटेड (बीएसईः 544780 और एनएसईः वीएएमएल) है, जो अलग-अलग बैंकों से तकरीबन रु 13,500 करोड़ की राशि जुटा रही है। ख़बरों के मुताबिक इन लोन से इंटीग्रेटेड कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर से मिले पिछले ऋण को रीफाइनैंस किया जाएगा। खास बात यह है कि यह लोन मात्र 7.9 – 8 फीसदी की दर पर मिला है, यानि डोमेस्टिक लेंडर्स तक कंपनी की पहुँच बेहतर हुई है। वेदांता लिमिटेड (बीएसईः 500295, एनएसईः वीईडीएल) ने अच्छे नेट डेब्ट / EBITDA रेशो (लगभग 0.3गुना ) के साथ वित्तीय वर्ष 27 की शुरुआत की है। वहीं पहली तिमाही के बाद स्वतंत्र कंपनी के रूप में वेदांता एलुमिनियम का रेशो तकरीबन 0.9 गुना था।
डीमर्जर का सबसे बड़ा फ़ायदा यही हैः अब हर बिज़नेस अपनी कमाई, कैश बनाने की क्षमता, निवेश और विकास की ज़रूरतों के अनुसार पूंजी जुटा रहा है।
बेहतर होते क्रेडिट प्रोफ़ाइल से ग्रुप की फ़ाइनैंसिंग मजबूती का भी संकेत मिलता है। वेदांता लिमिटेड, वेदांता एलुमिनियम (एनएसईःवीएएमएल) और वेदांता ऑयल एंड गैस (एनएसईः वीओजीएल) को क्रिसाइल और आईसीआरए से एए प्लस/स्टेबल रेटिंग मिली है, जबकि वेदांता आयरन एंड स्टील (एनएसईः वीआईएसएल) को क्रिसाइल से एए/स्टेबल रेटिंग मिली है। यह रेटिंग डीमर्जर के बाद कंपनी के अलग-अलग बिज़नसेज़ में आ रही मजबूती को दर्शाती है। इससे यह भी साफ है कि इन बिज़नसेज़ को अब बेहतर ब्याज पर लोन मिल सकता है।
इसी तरह वेदांता रिसोर्सेज़ भी अपना लोन लगातार कम कर रही है। वित्तीय वर्ष 26 के दौरान कपंनी अपने नेट डेब्ट में 500 मिलियन डॉलर की कमी लाई। इसके बाद वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में भी नेट डेब्ट में 1.1 बिलियन डॉलर की और गिरावट देखी गई। इस तरह कंपनी का नेट डेब्ट 9.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। परिणाम यह हुआ कि ग्रुप का नेट डेब्ट/ EBITDA रेशो जो मार्च 2025 में 2.0 गुना था वह वित्तीय वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.2 गुना पर पहुंच गया। साल के अंत में ग्रुप के पास 3.3 बिलियन अमेरिकी डालर का नकद एवं नकद समकक्ष था, जिससे बेहतर लिक्विडिटी मिली।
वित्तीय लागत की बात करें तो यह वित्तीय वर्ष 26 में 31 फीसदी सालाना कम होकर 1,485 मिलियन अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गई जो वित्तीय वर्ष 25 में 2,164 मिलियन थी। कम ब्याज दरों पर रीफाइनैंस और महंगा लोन चुकाकर कंपनी ने यह सुधार किया है। वेदांता रिसोर्सेज़ ने मैच्योरिटी की अवधि बढ़ाने और फंडिंग की लागत कम करने के लिए बार-बार लायबिलिटी मैनेजमेंट और रीफाइनैंसिंग का इस्तेमाल किया है। मूडीज़ के अनुसार दिसंबर 2025 में लायबिलिटी मैनेजमेंट और डेब्ट रीफाइनेंसिंग से फंडिंग की लागत वित्तीय वर्ष 26 में 10 फीसदी से भी कम हो गई, जो पिछले साल 13 फीसदी थी। हाल ही में, एस एंड पी ने अनुमान लगाया कि अगर रीफाइनैंसिंग योजना के मुताबिक होती है, तो इससे सालाना ब्याज लागत में 150 मिलियन डॉलर की कमी आ सकती है, साथ ही सालाना मैच्योरिटी भी कम हो सकती है। कुल मिलाकर इससे फाइनैंशियल फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होगी।
ब्याज कम होने से बची राशि का इस्तेमाल डीलीवरेजिंग, विकास, इन्वेस्टमेंट या शेयरहोल्डरों को भुगतान करने के लिए किया जा सकता है। कम लीवरेज से कैपिटल एलोकेशन बेहतर होगा, जबकि मज़बूत रेटिंग के कारण कंपनियों को कम ब्याज़ पर बेहतर फाइनैंस की सुविधा मिलेगी, कुल मिलाकर बैलेंस शीट मजबूत होगी।
कुल मिलाकर वेदांता एक मजबूत फाइनैंशियल मॉडल की ओर बढ़ रही हैः जिसमें समझदारी से रीफाइनैंस करना, ब्याज की लागत कम करना, फ्री कैश फ्लो बनाना, लोन को तेज़ी से कम करना, विकास को गति प्रदान करना और शेयरहोल्डरों को बेहतर रिटर्न देना शामिल है।
