नई दिल्ली: भारत में वर्ष 2020 से स्कूल बैग के वजन को लेकर राष्ट्रीय नीति लागू है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बच्चे के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके बावजूद देशभर में बड़ी संख्या में बच्चे अब भी भारी बैग लेकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। नीति में स्कूल बैग का नियमित वजन करने, पाठ्यपुस्तकों और नोटबुक की संख्या को तर्कसंगत बनाने, हल्के एवं सुविधाजनक बैग के इस्तेमाल तथा ऐसी समय-सारणी बनाने की सिफारिश की गई है, जिससे बच्चों को रोजाना कम किताबें ढोनी पड़ें। हालांकि, इन दिशा-निर्देशों का पालन अभी भी समान रूप से नहीं हो रहा है।
प्रख्यात समाजसेवी, वन्यजीव प्रेमी एवं प्रभा खेतान फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी संदीप भूतोड़िया ने इस गंभीर विषय की ओर समाज का ध्यान आकर्षित करने और मौजूदा दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की पहल की है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी को पत्र लिखकर बच्चों पर भारी स्कूल बैग के बढ़ते बोझ का मुद्दा उठाया। उनका यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया और देखते ही देखते यह पहल एक अभियान का रूप लेने लगी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर गया।
जयंत चौधरी ने भी इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्कूल बैग नीति के उस दिशा-निर्देश को प्रमुखता से रेखांकित किया, जिसके अनुसार विद्यार्थी के स्कूल बैग का वजन उसके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्कूल स्तर पर इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर देते हुए राज्य सरकारों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग का आह्वान किया।
भारी स्कूल बैग की समस्या केवल वजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात से भी जुड़ी है कि स्कूल का दैनिक शैक्षणिक कार्यक्रम किस तरह तैयार किया जाता है। कई पाठ्यपुस्तकें, नोटबुक, अतिरिक्त अध्ययन सामग्री और प्रोजेक्ट सामग्री बच्चों के बैग का वजन बढ़ाती हैं। स्कूलों में वजन मापने की व्यवस्था, निर्धारित वजन सीमा का स्पष्ट प्रदर्शन, नियमित जांच, संतुलित टाइमटेबल और अगले दिन आवश्यक किताबों की पूर्व जानकारी जैसे छोटे कदम इस बोझ को काफी कम कर सकते हैं।
हल्का स्कूल बैग शिक्षा को हल्का नहीं करता, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और प्रभावी बना सकता है। भारत के पास स्कूल बैग के वजन को लेकर पहले से स्पष्ट नीति है। अब जरूरत इस बात की है कि इन दिशा-निर्देशों को कागजों से निकालकर स्कूलों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि बच्चे स्कूल से घर लौटते समय भारी बैग नहीं, बल्कि ज्ञान, जिज्ञासा और नए विचार लेकर लौटें।
