‘वर्क से ज्यादा नेटवर्क का महत्व’: एमसीयू में गूंजा पीआर दिवस का मंत्र

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भोपाल: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के जनसंपर्क विभाग द्वारा राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के कई प्रतिष्ठित जनसंपर्क अधिकारियों ने शिरकत की और विद्यार्थियों को पीआर (PR) विधा की बारीकियों से रूबरू कराया। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में सीएसआर (CSR) और पीआर की भूमिका तथा उनके बीच का समन्वय रहा।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ‘वर्क’ से ज्यादा ‘नेटवर्क’ का महत्व है। उन्होंने चाणक्य का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे मजबूत नेटवर्क समाज और शासन के कल्याण का आधार बनता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अमृतलाल नागर की ‘नाच्यो बहुत गोपाल’, विनोद कुमार शुक्ल की ‘दीवार में एक खिड़की रहती है’ और तोताराम सनाढय की ‘गिरमिटिया’ पर आधारित पुस्तक पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को उद्योग जगत के साथ जोड़कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना हमारी प्राथमिकता है।

एनपीसीआईएल (मुंबई) के अमृतेश श्रीवास्तव ने फिल्म ‘खुशियों की स्क्रिप्ट’ के माध्यम से समझाया कि सीएसआर और पीआर एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने तारा नामक महिला की सफलता की कहानी सुनाई, जिसे सिलाई मशीन व प्रशिक्षण मिलने के बाद वह न केवल बुटीक की मालकिन बनी, बल्कि उसके बनाए कपड़े ऑस्ट्रेलिया तक प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कहा कि मदद करने से अधिक पुण्य का काम किसी के जीवन में समृद्धि लाना है।

पीआईबी (भोपाल) के मनीष गौतम ने कहा कि सरकारी नीतियों को सही माध्यम से सही व्यक्ति तक पहुँचाना एक जनसंपर्क अधिकारी का बड़ा दायित्व है। उन्होंने छात्रों से ‘स्पीड’ के बजाय ‘सत्य’ को अपना साथी बनाने का आह्वान किया। एनएफएल (विजयपुर, गुना) के विक्रम रावत ने कहा कि पीआर में आने वाले बदलावों को जनकल्याण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने एमसीयू के सामुदायिक रेडियो ‘रेडियो कर्मवीर’ की सराहना की।

जिंदल स्टील (रायगढ़) के पारस पाठक ने कहा कि पब्लिक रिलेशन का नया अर्थ अब ‘परसपसफुल रिलेशन’ (Purposeful Relation) है। उन्होंने कहा कि सीएसआर और पीआर का गठबंधन शुभ है और ये दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि केवल कंटेंट न बनाएं, बल्कि उसके ‘कॉन्टेक्स्ट’ (संदर्भ) को भी समझें।

कार्यक्रम में अशोक मनवानी, अंकिता दास, सौरभ पवार, मनोज द्विवेदी, अमृतांशी जोशी, कीर्ति चतुर्वेदी, आयुष ओझा, अभय कर्ण, आरती श्रीवास्तव, विभोर शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे।

आरंभ में विभागाध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए इतने सारे विशेषज्ञों की उपस्थिति पर प्रसन्नता जताई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा आपदा प्रबंधन पर एक नाटिका और विज्ञापन भी प्रदर्शित किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जया सुरजानी ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रो. संजय द्विवेदी और डॉ. अविनाश वाजपेयी ने किया। अंत में डॉ. दीपिका सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।

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