मुंबई, : वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने और आयात पर निर्भरता कम करने की अपील का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सुझाव दिया कि तेल, सोना और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के भारी आयात को कम करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना ही एकमात्र स्थायी समाधान है। अग्रवाल के अनुसार, भारत अपनी मौजूदा भूगर्भीय क्षमता और संपत्तियों (Assets) के दम पर बहुत कम समय में उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ा सकता है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने दो प्रमुख सुधारों की वकालत की है— सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) का निजीकरण और क्लीयरेंस प्रक्रियाओं में ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ की अनुमति। उन्होंने उल्लेख किया कि खनन और संसाधन क्षेत्र में ऐसी 24 पीएसयू हैं जिनका निजीकरण उत्पादन में कई गुना वृद्धि कर सकता है। विशेष रूप से हिंदुस्तान जिंक (HZL) और बाल्को (BALCO) में सरकार की शेष हिस्सेदारी के निजीकरण से निवेश, नई तकनीक और रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
अपने अनुभव को साझा करते हुए अग्रवाल ने बताया कि 2002 में जब वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक का अधिग्रहण किया था, तब भारत जिंक के लिए आयात पर निर्भर था, लेकिन आज वही संपत्तियाँ देश को आत्मनिर्भर बना रही हैं। इसी तरह एल्युमीनियम उत्पादन भी 1 लाख टन से बढ़कर 60 लाख टन की राह पर है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और विकास (R&D) के जरिए भारत अब चांदी, लेड और रेयर अर्थ्स जैसे संसाधनों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
अनिल अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र पर भरोसा बढ़ाना चाहिए ताकि तेल, तांबा और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों के लिए विदेशों पर निर्भरता और उससे जुड़ी आर्थिक कमजोरियों (Vulnerabilities) को पूरी तरह खत्म किया जा सके। उन्हें पूरा विश्वास है कि मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग से भारत घरेलू स्तर पर इतनी क्षमता विकसित कर सकता है कि भविष्य में किसी भी बड़े आयात की जरूरत ही न पड़े। यह कदम प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
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