अप्रैल में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 3.48% हुई: एसबीआई रिसर्च ने ग्रामीण मांग और आपूर्ति बाधाओं के प्रभाव को रेखांकित किया

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मुंबई : एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने अपनी नवीनतम ‘इकोवैप’ (Ecowrap) रिपोर्ट में बताया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल 2026 में मामूली रूप से बढ़कर 3.48% हो गई, जो मार्च 2026 में 3.40% थी। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि समग्र मुद्रास्फीति अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों और ग्रामीण बाजारों में कीमतों का दबाव देखा जा रहा है।

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष ग्रामीण और शहरी मुद्रास्फीति के बीच का अंतर है। ग्रामीण मुद्रास्फीति (3.74%) शहरी मुद्रास्फीति (3.16%) से आगे निकल गई है। इसका मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं हैं। अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4.01% हो गई, जिसमें चिकन, दूध और वनस्पति तेल (रिफाइंड और सरसों का तेल) प्रमुख योगदानकर्ता रहे। यह वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हो रही वृद्धि के अनुरूप है।

रिपोर्ट में विशिष्ट कमी और वैश्विक रुझानों के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया है। रेस्तरां और आवास सेवाओं की मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसका कारण एलपीजी (LPG) की कमी को बताया गया है। इसके विपरीत, सोने और चांदी की कीमतों में नरमी के कारण व्यक्तिगत देखभाल (personal care) श्रेणी की मुद्रास्फीति में 100 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई। पश्चिम एशिया के संकट और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के बावजूद, मौजूदा महीने के सीपीआई पर इसका सीधा प्रभाव सीमित रहा है।

डॉ. सौम्य कांति घोष, समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार, एसबीआई ने कहा: “हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति एक सीमित दायरे में बनी हुई है, लेकिन ग्रामीण मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि आपूर्ति-पक्ष की चुनौतियों को दर्शाती है। वैश्विक स्तर पर खाद्य तेल और मांस की कीमतों का रुझान हमारे घरेलू आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी चक्रों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है।”

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