कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने स्किल्स, स्केल और ट्रांसफॉर्मेशन के 12 वर्ष पूरे किए; दुनिया के सबसे बड़े स्किलिंग इकोसिस्टम में से एक का निर्माण किया

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  • पूरे भारत में 13,888 से अधिक औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) चल रहे हैं।
  • 2016 से 56.08 लाख से ज़्यादा अप्रेंटिस को काम पर रखा गया है।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत 1.64 करोड़ से ज़्यादा युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।
  • स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) पर 1.5 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
  • ग्लोबल वर्कफोर्स मोबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर्स की घोषणा की गई।

नई दिल्ली : भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयन्त चौधरी के नेतृत्व में, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) स्किल्स, स्केल और ट्रांसफॉर्मेशन के बारह वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। यह दुनिया के सबसे बड़े स्किलिंग इकोसिस्टम में से एक के विकास और ‘विकसित भारत 2047’ की ओर भारत की यात्रा में इसके योगदान को रेखांकित करता है।

बारह वर्षों में, मंत्रालय ने एक ऐसा व्यापक स्किलिंग इकोसिस्टम बनाया है जो वोकेशनल एजुकेशन, इंडस्ट्री-लेड ट्रेनिंग, अप्रेंटिसशिप, एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटरनेशनल वर्कफोर्स मोबिलिटी को एक ही यूनिफाइड नेशनल फ्रेमवर्क में जोड़ता है। निरंतर सुधारों, संस्थागत मजबूती और इंडस्ट्री, एकेडेमिया और राज्य सरकारों के साथ मजबूत सहयोग के द्वारा, स्किल इंडिया दुनिया के सबसे बड़े और सबसे विविध स्किलिंग इकोसिस्टम में से एक बन गया है।

भारत सरकार के माननीय कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयन्त चौधरी ने कहा, “पिछले बारह वर्षों का सफ़र भारत की इस बढ़ती समझ को दर्शाता है कि स्किल्स, अवसर, प्रोडक्टिविटी और आर्थिक बदलाव के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक हैं। मंत्रालय ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने के लिए काम किया है जहाँ स्किल्स को फॉर्मल एजुकेशन के साथ-साथ सीखने, रोज़गार और आजीवन विकास का एक अभिन्न हिस्सा माना जाता है। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज़ को नया आकार दे रही हैं और काम करने का तरीका बदल रहा है, हमारा ध्यान भारत के युवाओं को न केवल मौजूदा अवसरों के लिए, बल्कि आने वाले वर्षों में उभरने वाली नौकरियों और एंटरप्राइज के लिए भी तैयार करने पर है। मज़बूत इंडस्ट्री पार्टनरशिप, डिजिटल इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और वैश्विक मोबिलिटी के अवसरों के माध्यम से, हम एक ऐसी वर्कफ़ोर्स तैयार कर रहे हैं जो कॉन्फिडेंट और प्रतिस्पर्धी है और भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए तैयार है।

स्किलिंग लाइफ़साइकल के हर चरण पर मंत्रालय का असर दिखाई देता है। भारत के वोकेशनल ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी विस्तार हुआ है, 2014 में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या 9,776 थी, जो आज बढ़कर 13,888 से अधिक हो गई है। राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों, प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों और जन शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर, इन संस्थानों ने पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास के अवसरों तक पहुँच का विस्तार किया है। मंत्रालय ने गांधीनगर, मुंबई और कानपुर में तीन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्किल्स (आईआईएस) भी स्थापित किए हैं, जो इंडस्ट्री की ज़रूरतों के हिसाब से और भविष्य के लिए तैयार करने वाली ट्रेनिंग देने हेतु अत्याधुनिक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस के तौर पर काम करेंगे।

अप्रेंटिसशिप शिक्षा और रोज़गार के बीच सबसे मज़बूत ब्रिज में से एक बनकर उभरा है। वर्ष 2016 से 56.08 लाख से अधिक अप्रेंटिस को काम पर रखा गया है। इसमें उन सुधारों की अहम भूमिका रही है, जिनसे इंडस्ट्री और युवाओं की भागीदारी बढ़ी है और साथ ही काम के दौरान सीखने के अवसर भी मजबूत हुए हैं।

मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसे फ्लैगशिप कार्यक्रमों के ज़रिए बड़े पैमाने पर कम समय के स्किलिंग कार्यक्रम भी चलाए हैं, जिनके तहत 1.64 करोड़ से ज़्यादा उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही, नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिज़नेस डेवलपमेंट (निस्बड) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (आईआईई) के नेतृत्व में चलाई जा रही एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट पहल के तहत, एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी) में 25 लाख से अधिक उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी गई है, जिससे शहरी, ग्रामीण और आकांक्षी ज़िलों में नए बिज़नेस शुरू करने, स्वरोज़गार और आजीविका के साधन बनाने के रास्ते खुले हैं।

मंत्रालय की ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी की एक महत्वपूर्ण विशेषता डिजिटल-फर्स्ट’ स्किलिंग इकोसिस्टम का निर्माण रही है। स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) स्किलिंग के लिए एक इंटीग्रेटेड डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर उभरा है, जो स्किलिंग, जॉब्स, अप्रेंटिसशिप और एंटरप्रेन्योरशिप के अवसरों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाता है। आज, सिद्ध पर 1.5 करोड़ से ज़्यादा उम्मीदवार रजिस्टर्ड हैं, जिसमें 23 भाषाओं में 1,000 से ज़्यादा कोर्स उपलब्ध हैं। SOAR (स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस) जैसे कार्यक्रम ने अलग-अलग सेक्टर में 50 से अधिक एआई कोर्स और क्वालिफिकेशन के जरिए सीखने वालों और शिक्षकों के बीच एआई के बारे में जागरूकता और तैयारी को और बढ़ाया है। लॉन्च के बाद से उभरते हुए टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में 4.5 लाख से ज़्यादा लोगों ने इसमें एनरोल किया है।

वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन के ज़रिए भारत ने वैश्विक मंच पर भी कौशल के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता दिखाई है। टीम इंडिया ने प्रमुख देशों के बीच अपनी स्थिति को लगातार मजबूत किया है और अपनी ग्लोबल रैंकिंग को 2015 में 29वें स्थान से बेहतर करके 2024 में 13वें स्थान पर पहुँचाया है। इंडियास्किल्स और वर्ल्डस्किल्स में भारत की भागीदारी स्किल एक्सीलेंस के लिए एक नेशनल मूवमेंट बन गई है, जो युवाओं को विश्व-स्तरीय मानकों को अपनाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय प्रतिभा की क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।

ग्लोबल टैलेंट पार्टनर के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को पहचानते हुए, मंत्रालय ने इंटरनेशनल वर्कफोर्स मोबिलिटी पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है। गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट पार्टनरशिप, स्किल-बेस्ड मोबिलिटी एग्रीमेंट और स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की स्थापना के ज़रिए, भारत स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए ग्लोबल लेबर मार्केट में अवसरों तक पहुँचने के लिए विश्वसनीय रास्ते बना रहा है।

काम की बदलती दुनिया के हिसाब से मंत्रालय का सुधार एजेंडा लगातार विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री स्किलिंग और एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज में भविष्य के लिए ज़रूरी स्किल्स सिखाने वाले और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा के साथ स्किलिंग को बेहतर ढंग से जोड़ने जैसी पहलों के जरिए, मंत्रालय भविष्य के अवसरों और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार वर्कफोर्स का निर्माण कर रहा है।

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के बारह वर्ष पूरे होने पर, इसका पूरा ध्यान क्वालिटी को बेहतर बनाने, पहुँच बढ़ाने, इंडस्ट्री के साथ साझेदारी को मज़बूत करने, एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने, अप्रेंटिसशिप को तेज़ी से अपनाने और भारत को स्किल्ड टैलेंट के ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करने पर है। पिछले दशक की उपलब्धियाँ भारत की विकास यात्रा के अगले चरण के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करती हैं, जो स्किल्स, इनोवेशन और मानवीय क्षमता से प्रेरित है।

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