SBI रिसर्च रिपोर्ट – NFHS-6 सर्वे के नतीजे

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मातृ स्वास्थ्य और डिजिटल समावेशन में भारत ने लगाई लंबी छलांग; बच्चों के पोषण और बढ़ते मोटापे पर ध्यान देने की आवश्यकता

मुंबई : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के परिणामों पर आधारित अपनी विस्तृत शोध रिपोर्ट जारी की है। केंद्र सरकार द्वारा संकेतकों की बेहतर ट्रैकिंग के लिए 3 साल के निश्चित अंतराल पर आयोजित किए गए इस सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत ने महिलाओं के मातृ स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव (Institutional Births) और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में अभूतपूर्व प्रगति की है। हालांकि, रिपोर्ट बच्चों के पोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (NCD) के बढ़ते जोखिमों की ओर भी इशारा करती है।

मुख्य बिंदु:

  • मातृ स्वास्थ्य और प्रसव में ऐतिहासिक सुधार: देश में कम से कम 4 बार प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने वाली माताओं की संख्या NFHS-5 के 58.5% से बढ़कर 65.2% हो गई है। इसके साथ ही, भारत में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में जन्म) अब 90.6% के साथ सार्वभौमिक स्तर (Near Universal) के करीब पहुंच गया है।
  • बच्चों के पोषण में मिश्रित रुझान: 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग (ठिगनापन) का स्तर 35.5% से तेजी से घटकर 29.3% पर आ गया है, जो करीब 6 प्रतिशत अंकों का बड़ा सुधार है। हालांकि, अंडरवेट (31.8%) और वेस्टिंग (19.0%) के मोर्चे पर सुधार की गति अभी भी काफी धीमी है।
  • स्वास्थ्य खर्च और कुपोषण का सीधा संबंध: एसबीआई के रिग्रेशन मॉडल विश्लेषण से यह साबित हुआ है कि जो राज्य अपने चिकित्सा और स्वास्थ्य व्यय (जीएसडीपी का प्रतिशत) पर अधिक खर्च करते हैं, वहां बच्चों के कुपोषण में अधिक कमी आई है। ओडिशा अपनी जीएसडीपी का सबसे अधिक (1.93%) स्वास्थ्य पर खर्च कर रहा है, जबकि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य सबसे कम (~0.50%) खर्च कर रहे हैं।
  • बढ़ता मोटापा और मधुमेह का खतरा: सर्वेक्षण का सबसे चिंताजनक पहलू महिलाओं में बढ़ता मोटापा है। 15-49 वर्ष की महिलाओं में ओवरवेट या मोटापे की दर बढ़कर 30.7% हो गई है, जो शहरी क्षेत्रों में 42.8% के खतरनाक स्तर पर है। इसी मोटापे के कारण महिलाओं में हाई ब्लड शुगर (मधुमेह) बढ़कर 17.8% हो गया है। पुरुषों में भी हर 5 में से 1 पुरुष (20.9%) हाई ब्लड शुगर से पीड़ित है।
  • जनसांख्यिकीय बदलाव और बाल विवाह: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.0 पर स्थिर बनी हुई है। लेकिन शहरी भारत में यह दर घटकर 1.6 रह गई है, जो रिप्लेसमेंट लेवल से काफी कम है। पश्चिम बंगाल (1.3) और असम (1.2) में यह दर विकसित देशों के स्तर पर आ चुकी है। इसके विपरीत, बाल विवाह के मामलों में दीर्घकालिक गिरावट देखी गई है और यह अब कम होकर 20.1% रह गया है।
  • महिला सशक्तिकरण और डिजिटल क्रांति: वित्तीय समावेशन के चलते अब 89.0% भारतीय महिलाओं के पास अपना खुद का बैंक खाता है। साथ ही, 63.6% महिलाओं के पास अपना मोबाइल फोन है और 64.3% महिलाएं इंटरनेट का उपयोग कर रही हैं।
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