मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले आज एसबीआई रिसर्च ने अपनी नवीनतम शोध रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती घरेलू मुद्रास्फीति, भारतीय रुपये पर दबाव और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल को देखते हुए आरबीआई इस बार नीतिगत रेपो दर में कम से कम 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी के साथ दर वृद्धि चक्र की शुरुआत कर सकता है।
एसबीआई रिसर्च के विश्लेषण के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति (सीपीआई) बढ़कर 4.82% दर्ज की गई, जिसके वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में 6% से ऊपर जाने का अनुमान है। इसके साथ ही, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये में गिरावट दर्ज की गई है, जिसके लिए सट्टेबाजी रोकने हेतु सुरक्षात्मक उपाय आवश्यक हैं। रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि आरबीआई चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान में 30 बीपीएस और मुद्रास्फीति अनुमान में 20 बीपीएस का इजाफा कर सकता है।
रिपोर्ट में कृषि और मानसून की स्थिति पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत (LPA) का 87% रहा, जो 2000 के बाद से चौथा सबसे सूखा मानसून सीजन है। पंजाब, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कम बारिश और अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से रबी फसलों के उत्पादन और खाद्य कीमतों पर जोखिम बना हुआ है। बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट वृद्धि 18.1% पर मजबूत बनी हुई है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि विनियामक आवश्यकताओं (सीआरआर, एसएलआर, एलसीआर) के कारण बैंकिंग प्रणाली में तरलता (लिक्विडिटी) स्वतः समायोजित हो जाएगी।
