कांग्रेस लौटेगी सोचने वाले इस पर भी सोचें

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प्रदेश भर में कई लोग साल 2028 के अंत को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि भाजपा की सत्ता जाएगी और कांग्रेस दोबारा सरकार बनाएगी। लेकिन ये सोचने वालों को अपनी इस सोच पर दोबारा सोचना चाहिए। भाजपा सत्ता से क्यों ही बेदखल होगी, और जनता क्यों ही कांग्रेस को सत्ता सौंपेगी। कांग्रेस के पूरे प्रदेश के नेता अपनी पार्टी के सबसे बड़े नेता राहुल और प्रियंका गांधी के साथ नहीं दिख रहे वो जनता के साथ दिखेंगे। 2023 से कांग्रेस मप्र में चुनावी धांधली का आरोप लगा रही है। जिस नेता से मिलो कोई ईवीएम में सेटिंग तो कोई अफसरों और कोई चुनाव आयोग पर खुद को हरवाने का आरोप लगाता हुआ मिल जाएगा। कांग्रेसियों के ही इसी आरोप को मान भी लूं तो उन्हें हरवाने वाले जिस सिस्टम के खिलाफ उनके सबसे बड़े नेता दिल्ली में दो दिनों से लगातार धरना दे रहे हैं, सडक़ों पर घसीटे जा रहे हैं, गिरफ्तार हो रहे हैं। लेकिन पूरे प्रदेश के कांग्रेस नेता सोए हुए हैं। प्रदेश के सो कॉल्ड बड़े कांग्रेस नेताओं में से एक भी नेता ने अपने बड़े नेताओं के साथ हो रहे इस व्यवहार को लेकर कोई प्रदर्शन तो दूर बयान तक नहीं दिया। चलो उस पर नहीं तो चुनाव आयोग को लेकर आप बीती को तो जनता के सामने रख सकते थे, लेकिन उसका भी गुदा किसी कांग्रेस नेता ने नहीं दिखाया। और ये ही कांग्रेस के नेता सोचते हैं कि 2028 में जनता भाजपा को हटाकर उन्हें सत्ता सौंप देगी। लेकिन ये भूल गए हैं कि जनता समझदार है। सभी को इतनी समझ है कि जो अपने नेता के लिए नहीं लड़ सकते वो जनता के लिए उसकी परेशानी के लिए क्या खाक लड़ेंगे। ओर जो जनता के लिए नहीं लड़ सकता उसको सत्ता क्यों दें। ये कांग्रेसी उस भाजपा को सत्ता से बाहर करने की बात कर रहे हैं जिसके किसी नेता के खिलाफ कुछ होता है तो वो पूरे देश में हंगामा खड़ा कर देते हैं। बिहार चुनाव के समय जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी गई थी तो भाजपा ने पूरे देश में हंगामा खड़ा कर दिया था। टीवी, मोबाईल तो ठीक जमीन पर भी भाजपा के नेता दिख रहे थे। हर छोटी-बड़ी बात को लेकर भाजपा के नेता जमीन पर दिखते हैं। इंदौर में कुछ दिन पहले जब छात्रों की गुंज कार्यक्रम हुआ था तो कांग्रेस के नेताओं की हालत ये थी की वो जमीन पर पैर नहीं रख रहे थे। कईं बुझे हुए दीपक खुद को रोशनी का एक मात्र जरिया समझ रहे थे। इस कार्यक्रम को ही सत्ता के शपथग्रहण का टिकिट मानने वाले नेता राहुल गांधी के सामने सडक़ पर संघर्ष की बात कर रहे थे, लेकिन आज वे नेता उन्हीं राहुल गांधी के लिए भी सडक़ पर नहीं उतर पा रहे हैं। ऐसे डरे हुए नेताओं का जनता क्यों ही साथ देगी। कांग्रेसी उस भाजपा को हराने की बात कर रहे हैं जिसका कार्यकर्ता साल के 365 दिन में से 300 दिन पार्टी के किसी न किसी कार्यक्रम, आयोजन के नाम पर जनता के बीच रहता है। जनता की भावना को समझता है। दूसरी ओर कांग्रेस है जिसको विधानसभा तो दूर वार्ड के चुनावों में भी न तो कार्यकर्ता मिलते हैं न ही मुद्दे। कांग्रेसी जनता की भावना को ही नहीं समझ पाते हैं तो जनता उन्हें क्यों ही समझेगी। जनता देखती है कि उसकी गंदे पानी की समस्या, टूटी सडक़ों की समस्या, उलझे ट्रैफिक की प्राब्लम, शहर में टैक्स के नाम पर वसूली, भ्रष्टाचार, सीवरेज के नाम पर बहते पैसे, सुविधा के नाम पर मिलती मौतों के समय कौन सी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए उनके साथ खड़े थे, कितने लोग थे जो लगातार उनकी मदद कर रहे थे, कौन था जो उनका हाल-चाल पूछता रहा। कौन था जो अपने नेता के आने पर उनके बीच आया और कौन हमेशा उनके साथ खड़ा रहा। जनता देखती है जो सोचते हैं कि भाजपा जाएगी और उनके दिन बदलेंगे तो ये उनकी भूल है और वे इस खुशफहमी से जितनी जल्दी हो सके बाहर आ जाएं तो ये उनके लिए ही ठीक रहेगा।

admin1

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