भोपाल के सिद्धांता हॉस्पिटल पर गाज, लाइसेन्स निरस्त — CMHO की रिपोर्ट में चौकाने वाले बड़े खुलासे

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भोपाल के सिद्धांता हॉस्पिटल में मौत का इंतजाम — CMHO जांच में मिलीं 11 चौंकाने वाली कमियां

भोपाल के पोश इलाके शिवाजी नगर स्थित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (रेडक्रॉस) की CMHO जांच में मानव जीवन से खिलवाड़ के सारे सबूत मिल गए हैं। 31 अगस्त को हुई औचक जांच की रिपोर्ट में 11 गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं।

जांच में मिलीं चौंकाने वाली कमियां:

  1. इमरजेंसी रूम सिर्फ नाम का — अंदर ब्लड सैंपल का खेल
    मुख्य द्वार के अंदर दाहिनी तरफ कक्ष पर “इमरजेंसी रूम” का बोर्ड था, लेकिन अंदर मरीजों के ब्लड सैंपल लिए जा रहे थे। वहां न कोई डॉक्टर था, न ही मरीजों का परीक्षण हो रहा था। गंभीर मरीज भ्रम में पड़कर जान गंवा सकता है।
  2. जान बचाने वाले उपकरण ताले में बंद — डिफिब्रिलेटर तक नहीं
    इमरजेंसी कक्ष में डिफिब्रिलेटर तक नहीं मिला। Crash Cart और Emergency Medicine Drawer निरीक्षण के समय लॉक पाए गए।
  3. ट्रायज एरिया में ड्रेसिंग
    जहां गंभीर मरीजों की छंटनी होनी चाहिए, वहां बेड लगाकर ड्रेसिंग की जा रही थी।
  4. OPD में डॉक्टर ही नहीं, सूचना पटल पर फर्जी टाइमिंग
    OPD कक्ष-01 में डॉ. राहुल पेसवानी मौजूद थे, लेकिन सूचना पटल पर न समय था न विशेषज्ञता का उल्लेख। अन्य OPD कक्ष में भी डॉक्टर सूचना पटल के समय पर मौजूद नहीं थे।
  5. डायलिसिस वार्ड में बड़ा खतरा — बिना डॉक्टर, बिना रिपोर्ट, बिना सेफ्टी के डायलिसिस
    मुख्य द्वार के बाएं तरफ डायलिसिस कक्ष में 7 बेड पर डायलिसिस चल रही थी, लेकिन ड्यूटी पर एक भी डॉक्टर नहीं, सिर्फ 2 टेक्नीशियन। किसी मरीज की सीरोलॉजी रिपोर्ट नहीं। सीरो-पॉजिटिव केस के लिए अलग मशीन या व्यवस्था नहीं। टेक्नीशियन नीरज शर्मा व सुरेश वासुनिया के पास अर्हता प्रमाण-पत्र नहीं। एक प्रशिक्षु युवती वंदना पटेल बिना ID के ड्यूटी कर रही थी।
  6. रेडियोलॉजी में जान से खिलवाड़
    मोबाइल एक्स-रे यूनिट से अप्रशिक्षित स्टाफ रोशन मालवीय एक्स-रे कर रहा था। संकीर्ण कमरे में न लेड एप्रिन, न थायरॉइड कॉलर। मरीज को भी एक्स-रे रूम में बैठाकर एक्स-रे किया जा रहा था। AERB मापदंडों का उल्लंघन, प्लाई की पार्टिशन से बना एक्स-रे रूम।
  7. TMT रूम में डॉक्टर नहीं
    TMT (ट्रेड मिल टेस्ट) कक्ष में इमरजेंसी के लिए डिफिब्रिलेटर नहीं। टेक्नीशियन ने बताया कि जांच डॉ. गिरीश राजपाल करते हैं, पर मौके पर मौजूद नहीं।
  8. PET-CT स्कैन रूम में कबाड़
    रेडिएशन रोकने के AERB मापदंडों का पालन नहीं। PET-CT स्कैन रूम और कंसोल रूम में सिर्फ ग्लास पैनल। स्कैन रूम को स्टोरेज रूम बनाया गया था, अंदर डस्टबिन रखी थी। मरीज का चेंजिंग रूम 4×4 फीट के रेडियो हजार्ड रूम में था, हॉट लैब में भारी सीलन।
  9. संक्रमित मरीजों के केबिन में असंक्रमित मरीज भर्ती — संक्रमण का खतरा
    ICU और ICCU के बीच संक्रमित मरीजों के दो केबिन में कोई संक्रमित मरीज नहीं, बल्कि असंक्रमित मरीज भर्ती थे। Fumigation और कल्चर रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं।
  10. फर्जी RMO?
    ICU में RMO के रूप में सेवाएं दे रहे डॉ. पी.पी. मिश्रा (आधार नं. 904761322097) का MPMC रजिस्ट्रेशन निरीक्षण के समय उपलब्ध नहीं कराया गया।
  11. फायर सेफ्टी फेल + बिना माइक्रोबायोलॉजिस्ट के कल्चर रिपोर्ट
    ICU में सारे अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) खाली पाए गए, जबकि ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन जारी था। ICU मरीजों की कल्चर रिपोर्ट माइक्रोबायोलॉजिस्ट की जगह पैथोलॉजिस्ट साइन कर रहे थे, जबकि माइक्रोबायोलॉजिस्ट अस्पताल में है ही नहीं।
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