लॉरिट्ज नुडसेन ने 50 गीगावॉट सोलर क्षमता को सक्षम बनाने का मुकाम हासिल किया, वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में अपनी भूमिका दोहराई

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  • बड़े यूटिलिटी स्तर के सोलर फार्म से लेकर घरों की छतों पर लगे रूफटॉप सिस्टम और सोलर कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स तक, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में लॉरिट्ज नुडसेन की सात दशक पुरानी विरासत विभिन्न बाज़ारों की कम्युनिटीज़ तक क्लीन एनर्जी के फायदे पहुंचाने में मदद कर रही है।

मुंबई: भारत के इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेशन सेक्टर की अग्रणी कंपनियों में शामिल लॉरिट्ज नुडसेन इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन ने आज घोषणा की कि उसकी इलेक्ट्रिकल और डिजिटल टेक्नोलॉजीज़ ने भारत और दुनिया के अन्य बाज़ारों में 50 गीगावॉट से ज़्यादा सोलर क्षमता को संचालित करने में अहम भूमिका निभाई है।

यह उपलब्धि इस बात को साफ़ तौर पर दिखाती है कि लॉरिट्ज नुडसेन का फोकस सिर्फ सोलर क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सोलर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने पर है। इसका फायदा फैक्ट्रियों, खेतों, घरों और उन कम्युनिटीज़ तक पहुंच रहा है, जहां अब तक पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं। साथ ही यह देश के ऊर्जा बदलाव के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ज़रूरी बड़े स्तर के लक्ष्य को साथ लेकर चल रहा है।

भारत की सोलर यात्रा अब सिर्फ बड़े यूटिलिटी पार्कों तक सीमित नहीं रह गई है। अब इसका असर आखिरी छोर तक साफ़ दिखाई दे रहा है। पीएम-कुसुम योजना के तहत सिंचाई को बिजली मिल रही है, पीएम सूर्य घर योजना के ज़रिए घरों तक सोलर ऊर्जा पहुंच रही है और पारंपरिक बिजली ग्रिड से दूर बसे इलाकों को भी भरोसेमंद बिजली उपलब्ध हो रही है।

इस बदलाव की रफ्तार काफी तेज़ रही है। भारत लगातार अपनी सोलर क्षमता बढ़ा रहा है और अब देश की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सोलर की हिस्सेदारी लगभग 55 फीसदी हो गई है, जो 154 गीगावॉट से अधिक है। यह विस्तार दो समानांतर मोर्चों पर हो रहा है। पहला, बड़े यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स, जो बिजली ग्रिड की क्षमता बढ़ाते हैं और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हैं। दूसरा, छोटे और बिखरे हुए इंस्टॉलेशन जो सीधे आर्थिक और सामाजिक असर पैदा करते हैं।

लॉरिट्ज नुडसेन तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम करती है—यूटिलिटी स्तर के पावर प्लांट, कमर्शियल एंड इंडस्ट्रीज़ और रेजिडेंशियलकंपनी एडवांस एसी सॉल्यूशंस, डीसी स्विचगियर, स्मार्ट मीटरिंग और क्लाउड आधारित रिमोट मॉनिटरिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है, जिससे सोलर इंस्टॉलेशन सुरक्षित, भरोसेमंद और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने वाले बनते हैं। यह क्षमता भारत के इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में सात दशक से ज़्यादा के तजुर्बे पर आधारित है। कंपनी अब तक 2,350 से अधिक सोलर प्रोजेक्ट्स में सहयोग कर चुकी है, 350 से ज़्यादा ईपीसी कंपनियों और 300 से अधिक डेवलपर्स के साथ साझेदारी कर चुकी है। इसके अलावा 300 से अधिक सिस्टम इंटीग्रेटर्स को प्रशिक्षण देकर स्थानीय क्षमताओं को मज़बूत किया है, जो इस सेक्टर की लगातार तरक्की के लिए बेहद अहम है।

लॉरिट्ज नुडसेन इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन के मुख्य परिचालन अधिकारी नरेश कुमार ने कहा, “जब कोई किसान डीज़ल से चलने वाली सिंचाई छोड़कर सोलर आधारित सिंचाई अपनाता है या किसी परिवार को भरोसेमंद बिजली मिलने लगती है, तभी ऊर्जा बदलाव असल मायनों में हकीकत बनता है। 50 गीगावॉट की यह उपलब्धि सिर्फ इसके स्केल की वजह से अहम नहीं है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसका फायदा समाज के हर तबके तक पहुंच रहा है। हमारा मकसद हमेशा यही रहा है कि सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर भरोसेमंद, सभी की पहुंच में और समाज के हर वर्ग की ज़रूरतों को पूरा करने वाला हो।”

जैसे-जैसे भारत का सोलर इकोसिस्टम बढ़ा है, वैसे-वैसे इसकी तकनीकी जटिलता भी बढ़ी है। अधिक क्षमता, बदलती ग्रिड व्यवस्था और बिखरे हुए बिजली उत्पादन मॉडल्स के विस्तार के कारण अब अधिक एडवांस्ड और अलग-अलग उपयोग के हिसाब से तैयार किए गए इलेक्ट्रिकल सॉल्यूशंस की ज़रूरत बढ़ रही है।

लॉरिट्ज नुडसेन सोलर वैल्यू चेन के हर चरण में सहयोग करती है। बिजली उत्पादन से लेकर उसे ग्रिड तक पहुंचाने और ग्रिड में जोड़ने तक कंपनी अपनी सेवाएं देती है। कंपनी के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में भी यह बदलाव साफ़ दिखाई देता है। नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े उत्पादों जैसे मीडियम वोल्टेज सॉल्यूशंस, एसी और डीसी स्विचगियर, सॉफ्टवेयर और सर्विसेज़ में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

नवीकरणीय ऊर्जा का तेज़ी से बढ़ता इस्तेमाल देश में मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार को भी नई रफ्तार दे रहा है। वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2026 के बीच भारत की सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता और मज़बूत हुई है। लॉरिट्ज नुडसेन ने इस बदलाव में भविष्य की ज़रूरतों के मुताबिक तैयार मज़बूत इलेक्ट्रिकल सिस्टम उपलब्ध कराकर मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को सहयोग दिया है।

भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अब ध्यान सिर्फ क्षमता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि इस ऊर्जा बदलाव की गुणवत्ता पर भी है, ताकि ऊर्जा की पहुंच सिर्फ बढ़े ही नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक बराबरी से पहुंचे।

इस पूरी यात्रा में लॉरिट्ज नुडसेन की भूमिका अपने मूल उद्देश्य पर कायम है और वह है एक ऐसा मज़बूत इलेक्ट्रिकल ढांचा तैयार करना, जो सोलर ऊर्जा को भरोसेमंद, बड़े पैमाने पर विस्तार योग्य और भारत की विकास यात्रा के हर स्तर तक आसानी से पहुंचने योग्य बनाए।

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