भोपाल : मध्य प्रदेश में डेंगू और मलेरिया जैसी वेक्टर-जनित बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा कवच को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘होम इन्सेक्ट कंट्रोल एसोसिएशन’ (हिका) के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने घरेलू उपयोग वाले कीटनाशकों, जैसे लिक्विड वेपोराइज़र, कॉइल और एयरोसोल पर जीएसटी (GST) की दर को 18% से घटाकर 5% करने का पुरजोर आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री को ईवाय–हिका की “घरेलू उपयोग वाले कीटनाशकों के लिए जीएसटी को तर्कसंगत बनाना: सार्वजनिक स्वास्थ्य की अनिवार्यता” शीर्षक वाली रिपोर्ट के निष्कर्ष सौंपे। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जीएसटी कम होने से ये सुरक्षा उत्पाद अधिक किफायती होंगे, जिससे ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों तक इनकी पहुंच बढ़ेगी। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में वर्ष 2025 के दौरान डेंगू के 1,941 और मलेरिया के 2,307 मामले सामने आए थे, जो इस तरह के सुरक्षा उत्पादों की उपलब्धता को अनिवार्य बनाते हैं।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य ने पिछले दशक में मलेरिया के मामलों में 97% की उल्लेखनीय कमी हासिल की है। उन्होंने ईएमबीईडी (EMBED) जैसे कार्यक्रमों की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि मच्छरों से होने वाली बीमारियों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि नागरिकों को किफायती घरेलू कीटनाशक उत्पाद आसानी से मिल सकें। उन्होंने राज्य और केंद्र स्तर पर जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने पर विचार करने की बात भी कही।
हिका के सचिव और निदेशक जयंत देशपांडे ने इस मुद्दे के आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि 18% कर के कारण ये उत्पाद महंगे हो जाते हैं, जिससे आम जनता अक्सर बाजार में उपलब्ध असुरक्षित और गैर-विनियमित नकली उत्पादों की ओर रुख करती है। जीएसटी में कटौती से न केवल संगठित क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किफायती उत्पादों की खपत बढ़ने से अंततः सरकार का राजस्व भी बढ़ सकता है। ईवाय इंडिया के टैक्स पार्टनर बिपिन सप्रा ने भी सुझाव दिया कि जीएसटी को 5% तक सीमित करने से ग्रामीण और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल लक्ष्यों को प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।
