‘विकसित भारत’ के लिए एमएसएमई में अप्रेंटिसशिप का विस्तार: मंत्रालय ने तैयार किया भविष्य का रोडमैप

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नई दिल्ली: कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने 29 अप्रैल, 2026 को “सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने” के विषय पर एक उच्च-स्तरीय परामर्श कार्यशाला (वर्कशॉप) का आयोजन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत के अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम की छिपी हुई क्षमता को उजागर करना और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल (वर्कफोर्स) का निर्माण करना है। वर्तमान में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) में वृद्धि के बावजूद, अप्रेंटिसशिप का बड़ा हिस्सा बड़े उद्यमों तक सीमित है, जबकि 94% एमएसएमई अप्रेंटिस निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं।

कार्यशाला के मुख्य बिंदु और प्रस्तावित मॉडल: वर्कशॉप के दौरान एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई व्यावहारिक मॉडलों पर चर्चा की गई:

  • ग्रुप ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन (GTO): इसमें एमएसएमई के क्लस्टर एक ही प्रशासनिक केंद्र के तहत मिलकर अप्रेंटिस को रख सकते हैं।
  • अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP): यह छात्रों को एमएसएमई के साथ काम करते हुए यूजीसी (UGC) से मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री प्राप्त करने का अवसर देता है।
  • वर्क-इंटीग्रेटेड लर्निंग प्रोग्राम (WILP): यह औपचारिक शिक्षा को कार्यस्थल पर मिलने वाली व्यवस्थित ट्रेनिंग के साथ जोड़ता है।

नीतिगत सुधार और समावेशी दृष्टिकोण: कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव, श्रीमती देवश्री मुखर्जी ने जोर दिया कि सीखने और काम के बीच मजबूत जुड़ाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि अप्रेंटिसशिप को छोटे व्यवसायों के लिए सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, तो लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कार्यशाला के बाद 38वीं सेंट्रल अप्रेंटिसशिप काउंसिल की सब-कमेटी की बैठक भी हुई, जिसमें महिलाओं, दिव्यांग जनों और दूर-दराज के इलाकों के लोगों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।

निष्कर्ष और भविष्य की योजना: इस परामर्श का समापन एक स्पष्ट कार्य-योजना (रोडमैप) के साथ हुआ, जिसमें पायलट प्रोग्राम को को-डिज़ाइन करने और नीतिगत व नियामक सुधारों की पहचान की गई। इस कार्यक्रम में मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी श्री एन.के. सुधांशु, डायरेक्टर श्री वी.एस. अरविंद सहित नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका अंतिम लक्ष्य ऑनलाइन और वर्चुअल अप्रेंटिसशिप के दिशानिर्देशों के माध्यम से प्रशिक्षण को अधिक समावेशी और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना है。

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