जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक “भोपाल मैदान” का नाम बदलकर “नवाब मंसूर अली खान पटौदी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स” किए जाने के निर्णय पर भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद् इम्तियाज अली ने गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इम्तियाज अली ने अपने पत्र में कहा है कि “भोपाल मैदान” केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि भोपाल और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के ऐतिहासिक संबंधों, सांस्कृतिक विरासत और साझा इतिहास का प्रतीक रहा है। ऐसे ऐतिहासिक महत्व वाले स्थल का नाम परिवर्तन बिना व्यापक जनचर्चा और पारदर्शी प्रक्रिया के किया जाना अनेक प्रश्न खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि यह भी सार्वजनिक चर्चा का विषय होना चाहिए कि नवाब मंसूर अली खान पटौदी का भोपाल के सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक अथवा खेल विकास में ऐसा कौन-सा विशिष्ट योगदान रहा है जिसके आधार पर भोपाल की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े मैदान का नाम उनके नाम पर रखा गया। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
इम्तियाज अली ने कहा कि भोपाल का इतिहास केवल किसी राजपरिवार का इतिहास नहीं, बल्कि यहां की जनता, सामाजिक आंदोलनों, शिक्षा, संस्कृति और साझी विरासत का इतिहास है। यदि सार्वजनिक संस्थानों और ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को किसी विशेष परिवार या वंश से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, तो यह स्वाभाविक रूप से बहस का विषय बनेगा।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या इस प्रकार के निर्णय सामंतवादी मानसिकता की निरंतरता का प्रतीक नहीं हैं, जहां सार्वजनिक स्मृतियों और ऐतिहासिक पहचान पर कुछ परिवारों का वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक भारत में इतिहास और विरासत से जुड़े निर्णय जनता की भावनाओं, ऐतिहासिक तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के आधार पर होने चाहिए।
इम्तियाज अली ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांग की है कि नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया, निर्णय लेने वाले प्राधिकरण, उसके औचित्य तथा संबंधित अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि इस विषय में उत्पन्न सभी शंकाओं का निराकरण हो सके।
उन्होंने कहा कि भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और विरासत किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर है, जिसका संरक्षण और सम्मान किया जाना आवश्यक है।
इम्तियाज अली
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद्
भोपाल
