मुंबई : भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च ने अपनी नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट (अंक 23, वित्त वर्ष 27) में पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों को लेकर पैदा हुए विवाद को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बैंक ने दो बिल्कुल अलग-अलग बेस (आधार वर्ष) वाली सीरीज की तुलना करके विकास दर का अनुमान लगाने की कोशिशों को “अनुचित, भ्रामक और बौद्धिक जड़ता का स्पष्ट संकेत” करार दिया है।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में स्थिर मूल्यों पर 7.8% और वर्तमान मूल्यों पर 10.3% की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर दर्ज की है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने नए बेस (2022-23) के Q1 FY27 के आंकड़ों (₹88.3 लाख करोड़) की तुलना पुराने बेस (2011-12) के बिना संशोधित Q1 FY26 के आंकड़ों (₹86.1 लाख करोड़) से करके नाममात्र (Nominal) जीडीपी वृद्धि दर को महज 2.6% बताया, जिससे अनावश्यक भ्रम पैदा हुआ।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दो अलग-अलग आधार वर्षों के आंकड़ों की आपस में तुलना करना मौलिक रूप से गलत है। यदि नए 2022-23 बेस के तहत ही समान तुलना की जाए, तो Q1 FY26 का संशोधित नाममात्र जीडीपी ₹80.4 लाख करोड़ (या 31 अगस्त के हालिया रिलीज में ₹80.0 लाख करोड़) बैठता है। इस आधार पर Q1 FY27 का नाममात्र जीडीपी विकास दर 9.7% निकल कर आता है। यदि इसका काल्पनिक रूप से भी समायोजन किया जाए, तब भी वास्तविक (Real) जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहेगी, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच बेहद मजबूत स्थिति को दर्शाती है।
एसबीआई रिसर्च ने रेखांकित किया कि जीडीपी आंकड़ों में संशोधन एक सामान्य और अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है। अगस्त 2026 में जारी किए गए Q1 FY27 के आंकड़े लगभग 30 महीनों की प्रक्रिया के बाद फरवरी 2029 में जाकर अंतिम रूप से तय होंगे। एनएसओ द्वारा सीपीआई, आईआईपी, डब्ल्यूपीआई और पीपीआई जैसे मूल्य व उत्पादन सूचकांकों में तालमेल बैठाने के लिए यह संशोधन किया गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट ने इस धारणा को भी खारिज किया कि आधार वर्ष बदलने से जीडीपी का आकार हमेशा बड़ा हो जाता है, क्योंकि इस बार के संशोधन में नाममात्र जीडीपी का आकार पहले से कम हुआ है।
