SBI रिसर्च का अनुमान: वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच FY27 में भारत की GDP वृद्धि 6.8% रहने की संभावना

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मुंबई : SBI रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी नवीनतम आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट, “द ऑडेसिटी ऑफ फ्लीटिंग होप” (The Audacity of Fleeting Hope) जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.8% रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत, बुनियादी ढांचे (infrastructure) में निवेश और लचीले सेवा क्षेत्र के कारण भारत इस बार वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच भी मजबूती के साथ खड़ा है ।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • विकास की गति: वैश्विक अनिश्चितताओं और क्षेत्रीय संघर्षों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था सकारात्मक बनी हुई है। SBI रिसर्च ने FY27 के लिए GDP वृद्धि दर 6.8% से 7.1% के बीच रहने का अनुमान लगाया है ।
  • भू-राजनीतिक चुनौतियां: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में चल रहे युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया है, जिससे हीलियम, मीथेन और LNG जैसे महत्वपूर्ण घटकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। जब तक आपूर्ति पक्ष की बाधाएं दूर नहीं होतीं, कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल के आसपास रहने की संभावना है ।
  • बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र एक मजबूत नींव के साथ FY27 में प्रवेश कर रहा है। पिछले एक दशक में NPA का स्तर सबसे निचले स्तर पर है, बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत हैं और लाभप्रदता में सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) के लिए परिसंपत्तियों पर रिटर्न (RoA) 1.35% से 1.40% के दायरे में रहने की उम्मीद है ।
  • जलवायु जोखिम: ‘सुपर अल नीनो’ की संभावना एक प्रमुख जोखिम है। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कमजोर मानसून खाद्य सुरक्षा और मुद्रास्फीति (inflation) के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है। हालांकि, कृषि के संबद्ध क्षेत्रों (allied activities) में विविधीकरण से अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है ।
  • मौद्रिक नीति: विकास और मुद्रास्फीति के विरोधाभास को देखते हुए, रिपोर्ट का सुझाव है कि ‘lower-for-longer’ (ब्याज दरें लंबे समय तक कम) का दौर जारी रह सकता है। RBI द्वारा तब तक यथास्थिति बनाए रखने की संभावना है जब तक कि वैश्विक संघर्षों और जलवायु पैटर्न का पूर्ण प्रभाव स्पष्ट न हो जाए ।

रिपोर्ट के अनुसार, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रही है, वहीं बुनियादी ढांचे पर ध्यान और मजबूत घरेलू मांग भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में नई रणनीतिक भूमिका निभाने में मदद कर सकती है

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