मुंबई: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए वित्त वर्ष 2026 को कंपनी के इतिहास का एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने रिकॉर्ड वित्तीय परिणामों और 1 मई 2026 से प्रभावी हुए डीमर्जर (व्यावसायिक विभाजन) को कंपनी के विकास के अगले चरण का आधार बताया।
चेयरमैन के पत्र की मुख्य झलकियाँ और भविष्य का रोडमैप निम्नलिखित है:
- रिकॉर्ड वित्तीय प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने ₹1,74,075 करोड़ की कुल आय और ₹25,096 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया है। शेयरधारकों को इसका सीधा लाभ मिला, जहाँ कुल रिटर्न लगभग 50% रहा और ₹334 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया गया।
- डीमर्जर रोडमैप: 1 मई 2026 से लागू हुए डीमर्जर के तहत वेदांता के विभिन्न व्यवसायों को स्वतंत्र कंपनियों में बदला गया है। इसका उद्देश्य हर इकाई को अपने क्षेत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से विकसित करना है।
- प्रमुख व्यावसायिक लक्ष्य:
- एल्युमिनियम: उत्पादन क्षमता को 60 लाख टन प्रति वर्ष तक दोगुना करने का लक्ष्य है।
- ऑयल एंड गैस: उत्पादन को 3,00,000 से बढ़ाकर 5,00,000 बैरल प्रति दिन तक ले जाने की योजना है।
- पावर: वर्तमान 4.2 GW क्षमता को बढ़ाकर 12 GW करने की पाइपलाइन तैयार है, जिससे यह देश की शीर्ष 3 पावर कंपनियों में शामिल होगी।
- आयरन एंड स्टील: इस्पात उत्पादन क्षमता को 40 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है।
- भविष्य के लिए निवेश: कंपनी ने विकास (Growth Capex) के लिए ₹15,000 करोड़ का निवेश किया है, जो एल्युमिनियम, जिंक और तेल व गैस जैसे क्षेत्रों में क्षमता विस्तार के काम आएगा। साथ ही, कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दे रही है।
अनिल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वेदांता लिमिटेड (मुख्य कंपनी) हिंदुस्तान जिंक में अपनी 60% हिस्सेदारी बनाए रखेगी और निकल व कॉपर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के माध्यम से भारत की आत्मनिर्भरता में योगदान देती रहेगी। उन्होंने इस पूरी यात्रा में महिला नेतृत्व और पर्यावरण सुरक्षा की भूमिका को भी सराहा।
