वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय को समावेशी स्वच्छता नवाचार के लिए मिला डिज़ाइन पंजीकरण; बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को मिलेगा लाभ

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सीहोर : नवाचार-आधारित शिक्षा और शोध उत्कृष्टता के क्षेत्र में अग्रणी, वीआईटी (VIT) भोपाल विश्वविद्यालय ने अपने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पोर्टफोलियो में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ ली है। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित “हाइब्रिड टॉयलेट फॉर किड्स, यंगस्टर्स एंड एल्डर्स” नामक एक अभिनव समावेशी स्वच्छता तंत्र को सफलतापूर्वक भारत सरकार से डिज़ाइन पंजीकरण (Design Registration) प्राप्त हुआ है।

विश्वविद्यालय के आईपीआर सेल (IPR Cell) के सक्रिय सहयोग से तैयार किया गया यह पंजीकृत नवाचार एक बेहद व्यावहारिक और अनुकूलनीय (Adaptable) स्वच्छता समाधान प्रस्तुत करता है।

नवाचार की मुख्य विशेषताएं और लाभ: मानव-केंद्रित इंजीनियरिंग दृष्टिकोण को दर्शाते हुए इस हाइब्रिड सिस्टम को इस तरह डिज़ाइन किया गया है जो हर आयु वर्ग की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करता है:

  • बहुउपयोगी मैकेनिज्म: इस प्रणाली में मॉड्यूलर फ्लैप्स और स्टेप मैकेनिज्म जैसी अनूठी सुविधाएं शामिल हैं, जो बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों के लिए एक समान रूप से सुविधाजनक उपयोग सुनिश्चित करती हैं।
  • एर्गोनॉमिक सहायता: यह डिज़ाइन शारीरिक गतिशीलता संबंधी सीमाओं (Mobility Issues) से पीड़ित व्यक्तियों या दिव्यांगों को भी बैठने और उपयोग करने में बेहतरीन एर्गोनॉमिक सहायता प्रदान करता है।

इस पंजीकृत डिज़ाइन को वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के डॉ. पुष्पदंत जैन तथा उनके होनहार विद्यार्थियों प्रदीप कुमार और निखिल कुमार के नेतृत्व में विकसित किया गया है।

दृश्य और कार्यात्मक संरचना की सुरक्षा इस गौरवपूर्ण अवसर पर स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर डॉ. पुष्पदंत जैन ने कहा, “यह डिज़ाइन पंजीकरण उपयोगकर्ता-केंद्रित स्वच्छता डिज़ाइन के प्रति हमारे अभिनव दृष्टिकोण को एक बड़ी मान्यता देता है। उपयोगिता पेटेंट (Utility Patent) के विपरीत, यह डिज़ाइन पंजीकरण विशेष रूप से इस प्रणाली की विशिष्ट दृश्य और कार्यात्मक संरचना (Visual and Functional Aesthetics) को सुरक्षा प्रदान करता है, जो हमारे इस नवाचार का मुख्य आधार था। हमारा लक्ष्य ऐसे व्यावहारिक इंजीनियरिंग समाधान विकसित करना है जो सुलभता और सामाजिक प्रासंगिकता का बेहतरीन समन्वय हों।”

मजबूत होती शोध संस्कृति इस बड़ी सफलता के अलावा, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से जुड़े कई अन्य पेटेंट और डिज़ाइन आवेदन भी वर्तमान में परीक्षण (Examination) के विभिन्न चरणों में हैं। यह प्रगति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वीआईटी भोपाल में छात्र और संकाय सदस्य मिलकर जमीनी स्तर पर सामाजिक प्रभाव डालने वाली तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों को विकसित करने के लिए एक दूरदर्शी शोध संस्कृति का निर्माण कर रहे हैं।

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