बेटियों की पढ़ाई पर संकट” : तिलक वार्ड कन्या माध्यमिक शाला के विलय का बढ़ा विरोध

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देवरीकला-:नगर के मध्य स्थित शासकीय कन्या माध्यमिक शाला तिलक वार्ड के प्रस्तावित विलय को लेकर अब अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों में गहरी चिंता दिखाई देने लगी है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक स्कूल का विलय नहीं, बल्कि गरीब और निर्धन परिवारों की बेटियों की शिक्षा पर सीधा प्रभाव डालने वाला फैसला है।

नगर का यह एकमात्र कन्या माध्यमिक विद्यालय है, जहां बड़ी संख्या में वे छात्राएं अध्ययन करती हैं जिनके माता-पिता अपनी बेटियों को को-एजुकेशन स्कूल में भेजना उचित नहीं मानते। वर्षों से यह स्कूल गरीब, मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवारों की बेटियों के लिए शिक्षा का सुरक्षित और सहज माध्यम बना हुआ है। ऐसे में विद्यालय का विलय किए जाने की खबर से अभिभावकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस सांदीपनि स्कूल में छात्राओं को स्थानांतरित किए जाने की बात कही जा रही है, वहां अभी तक समुचित परिवहन व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर शासन द्वारा देवरी क्षेत्र के बच्चों को साइकिल सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में तिलक वार्ड, पृथ्वी वार्ड और झुनकू वार्ड से आने वाली छात्राएं प्रतिदिन इतनी दूर पैदल कैसे जाएंगी, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
अभिभावकों ने चिंता जताते हुए कहा कि इस विद्यालय में पढ़ने वाली अधिकांश छात्राएं बेहद गरीब परिवारों से आती हैं। उनके माता-पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सुबह से शाम तक काम पर रहने वाले इन परिवारों के पास इतना समय और साधन नहीं कि वे प्रतिदिन अपनी बेटियों को दूर स्थित स्कूल छोड़ने और वापस लाने जा सकें। यदि विद्यालय दूर किया गया तो कई बच्चियों की पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा भी बढ़ जाएगा।
नागरिकों का कहना है कि नगर के बीचों-बीच स्थित यह विद्यालय वर्षों से अच्छी दर्ज संख्या वाला स्कूल रहा है और यहां शिक्षा का वातावरण भी बेहतर है। ऐसे में स्कूल को बंद या विलय करने के बजाय यहां सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिएं, ताकि गरीब परिवारों की बेटियां सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि छात्राओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शासकीय कन्या माध्यमिक शाला तिलक वार्ड का विलय तत्काल रोका जाए। उनका कहना है कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का संदेश तभी सार्थक होगा, जब बेटियों के लिए उपलब्ध विद्यालयों को बचाया जाएगा,न कि उन्हें बंद किया जाएगा।

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