सीडीएसएल और केपीएमजी की ‘रीइमेजिन’ रिपोर्ट: भारतीय प्रतिभूति बाजार को सशक्त बनाने के लिए ‘3सी’ फ्रेमवर्क का प्रस्ताव; डेटा सुरक्षा को बताया ‘मार्केट रिस्क’

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मुंबई : एशिया की पहली लिस्टेड डिपॉजिटरी, सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) ने केपीएमजी इन इंडिया (KPMG in India) के साथ मिलकर अपनी विचार नेतृत्व रिपोर्ट ‘रीइमेजिन’ का तीसरा संस्करण जारी किया है। “रीइमेजिन: सिक्योरिटीज़ मार्केट थ्रू डेटा सिनर्जी” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में भारतीय पूंजी बाजार को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक 3सी (Creation-Control-Culture) फ्रेमवर्क का सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि आधुनिक युग में “डेटा जोखिम ही बाजार जोखिम है”। डेटा गवर्नेंस में कोई भी चूक सीधे तौर पर निवेशकों के भरोसे और बाजार की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।


क्या है ‘3सी’ (3C) फ्रेमवर्क?

रिपोर्ट में प्रस्तावित यह ढांचा तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है, जो भारत को ‘विकसित भारत’ के विजन की ओर ले जाने में मदद करेगा:

  1. क्रिएशन (Creation): एक साझा डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘मार्केट डेटा डिक्शनरी’ का निर्माण करना। इसमें मशीन-रीडेबल डिस्क्लोजर और सुरक्षित एपीआई (API) पाइपलाइन शामिल हैं, जो नए वित्तीय उत्पादों के नवाचार (Innovation) का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
  2. कंट्रोल (Control): साइबर सुरक्षा को पोस्ट-क्वांटम खतरों के लिए तैयार करना और ‘प्राइवेसी-बाय-डिजाइन’ जैसे कड़े मानक लागू करना। साथ ही, जिम्मेदार एआई (AI) गवर्नेंस के लिए एक इंडस्ट्री-वाइड रजिस्ट्री बनाना।
  3. कल्चर (Culture): डेटा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्रोत्साहन (Incentives) से जोड़ना। बहुभाषी निवेशक शिक्षा के माध्यम से जागरूकता को ‘आत्मविश्वासपूर्ण भागीदारी’ में बदलना।

प्रमुख विजन और अवसर

नेहल वोरा (MD और CEO, CDSL) ने रिपोर्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“डेटा सिनर्जी वह शक्ति है जो नवाचार के साथ विश्वास को जोड़ती है। जब डेटा इंटरऑपरेबल (Interoperable) बनता है, तो यह ‘आत्मनिर्भर निवेशक’ को सशक्त बनाता है। यह केवल लेनदेन का मंच नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक मजबूती का आधार है।”

रिपोर्ट में उन चार क्षेत्रों की पहचान की गई है जहाँ डेटा बड़ा बदलाव ला सकता है:

  • प्राइस डिस्कवरी: अधिक सटीक मूल्य निर्धारण और क्यूरेटेड प्रोडक्ट्स।
  • पर्सनलाइजेशन: निवेशकों के लिए व्यक्तिगत स्तर का अनुभव।
  • रिस्क इंटेलिजेंस: धोखाधड़ी (Fraud) की रोकथाम के लिए बेहतर तकनीक।
  • रेगटेक और सुपटेक: नियामक निगरानी (Supervision) को तेज और प्रभावी बनाना।

बाजार की स्थिति और भविष्य

वर्तमान में भारत में घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगभग 20% है। केपीएमजी के पार्टनर अखिलेश टुटेजा के अनुसार, विकास का अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि हम ‘इंटेलिजेंट डेटा’ का कितनी कुशलता से उपयोग करते हैं। डेटा को अब केवल एक सूचना नहीं, बल्कि ‘कोर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर’ माना जाना चाहिए।

इस रिपोर्ट के विचार मंथन में सेबी (SEBI) के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान और एचडीएफसी के पूर्व सीईओ केकी मिस्त्री जैसे दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया, जिन्होंने “डेटा को ट्रस्ट की करेंसी” के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया।

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