ग्रेटर नोएडा : सस्टेनेबल डेवलपमेंट और रिस्पॉन्सिबल मैनेजमेंट एजुकेशन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) ने हाल ही में Erasmus+ द्वारा फंडेड KODECET (नॉलेज डेवलपमेंट फॉर सर्कुलर इकोनॉमी ट्रांजिशन) प्रोजेक्ट के तहत दो महत्वपूर्ण ‘रीजनल मल्टीप्लायर इवेंट्स’ का सफल आयोजन किया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य सर्कुलर इकोनॉमी शिक्षा को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ना रहा।
इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत के दिग्गजों, सीएसआर (CSR) पेशेवरों, और सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
KODECET प्रोजेक्ट और थ्री-कोर्स फ्रेमवर्क: KODECET एक अंतरराष्ट्रीय पहल है जिसमें भारत, थाईलैंड और यूरोप के शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इस इवेंट की सबसे बड़ी विशेषता थ्री-कोर्स फ्रेमवर्क की प्रस्तुति रही, जो सर्कुलर इकोनॉमी को समझने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है:
- कॉन्सेप्चुअल फाउंडेशंस: “क्या और क्यों” (सिद्धांतों की समझ)।
- इम्प्लीमेंटेशन और डिलीवरी: “कैसे” (व्यावहारिक क्रियान्वयन)।
- सिस्टम लीडरशिप: “किसके साथ” (हितधारकों के साथ नेतृत्व)।
शिक्षा और जिम्मेदारी का मेल: बिमटेक की डायरेक्टर डॉ. प्रबीना राजिब ने उच्च शिक्षा की बदलती भूमिका पर जोर देते हुए कहा:
“उच्च शिक्षा का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह ज्ञान को जिम्मेदारी के साथ कैसे जोड़ती है। सर्कुलर इकोनॉमी छात्रों को केवल करियर के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य के टिकाऊ सिस्टम और समाज के निर्माण के लिए भी तैयार करती है।”
उद्योग की अपेक्षाएं और नवाचार: KODECET की नेशनल लीड डॉ. वीनू शर्मा ने शिक्षा को बिखरे हुए शिक्षण (Fragmented Teaching) से हटाकर स्ट्रक्चर्ड करिकुलम की ओर ले जाने की आवश्यकता बताई। वहीं, डॉ. के.के. उपाध्याय (चेयरपर्सन, सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड सीएसआर) ने कहा कि आज उद्योगों को ऐसे पेशेवरों की जरूरत है जो सस्टेनेबिलिटी को जमीनी स्तर पर लागू कर सकें।
इवेंट के दौरान ‘सर्कुला गेम’ (Circula Game) जैसे एक्सपीरिएंशियल टूल्स और केस-बेस्ड लर्निंग का उपयोग किया गया, जिससे प्रतिभागियों को थ्योरी और रियल-वर्ल्ड एप्लिकेशंस के बीच के अंतर को समझने में मदद मिली। इस पहल के माध्यम से बिमटेक ऐसे ‘फ्यूचर-रेडी’ ग्रेजुएट्स तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहा है जो सर्कुलर और रीजेनेरेटिव इकोनॉमी में सार्थक योगदान देने में सक्षम हों।
