नई दिल्ली : भारत के कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी और फिनलैंड के रोजगार मंत्री श्री मटियास मार्टिनेन के बीच आज एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और वर्कफोर्स मोबिलिटी (कार्यबल की आवाजाही) के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना था।
श्री जयन्त चौधरी ने प्रधानमंत्री के विजन को साझा करते हुए कहा कि भारत अपनी युवा और गतिशील कार्यशक्ति के दम पर दुनिया की ‘ग्लोबल स्किल कैपिटल’ बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर दिया कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत और फिनलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर एक ऐसा सेतु (ब्रिज) बना सकते हैं, जिससे भारतीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च मानकों वाला प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।
सहयोग के प्रमुख बिंदु और क्षेत्र:
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: चर्चा में विशेष रूप से हेल्थकेयर, कंस्ट्रक्शन (निर्माण), ग्रीन टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई, जहाँ फिनलैंड के श्रम बाजार में भारतीय पेशेवरों की भारी मांग है।
- मोबिलिटी फ्रेमवर्क: दोनों देशों ने एक ऐसे ढांचे (फ्रेमवर्क) पर जोर दिया जो सर्टिफिकेशन, वर्कर वेलफेयर और भाषा प्रशिक्षण के उच्च मानकों को सुनिश्चित करते हुए कुशल पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाए।
- संस्थागत साझेदारी: भारतीय और फिनिश संस्थानों के बीच नॉलेज एक्सचेंज और उद्योग-नेतृत्व वाली कौशल पहलों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
फिनलैंड के मंत्री श्री मटियास मार्टिनेन ने भारतीय पेशेवरों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत का मजबूत स्किलिंग इकोसिस्टम फिनलैंड के वर्कफोर्स की चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम है। बैठक के दौरान व्यावसायिक योग्यताओं को आसानी से पहचानने और उभरती वैश्विक आवश्यकताओं के साथ कौशल मानकों को संरेखित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस उच्च-स्तरीय बैठक में भारत की ओर से एमएसडीई सचिव श्रीमती देवश्री मुखर्जी और फिनलैंड के प्रतिनिधिमंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह चर्चा न केवल भारत-फिनलैंड संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय करियर के नए द्वार भी खोलेगी।
