संबलपुर : देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में शुमार आईआईएम संबलपुर ने आज अपना 10वां वार्षिक दीक्षांत समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ओडिशा के माननीय राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभंपति उपस्थित रहे। समारोह के दौरान 5 विभिन्न कार्यक्रमों के कुल 416 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इस स्नातक समूह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अद्भुत लिंग विविधता रही, जहाँ 76% महिला विद्यार्थियों ने अपनी डिग्री प्राप्त कर प्रबंधन शिक्षा में एक नया उदाहरण पेश किया।
दीक्षांत समारोह में एमबीए (2024-26) बैच के 314 विद्यार्थियों के साथ कार्यकारी एमबीए और पीएचडी शोधार्थियों को भी सम्मानित किया गया। संस्थान ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदकों की भी घोषणा की, जिसमें श्रीजन चक्रवर्ती, वर्षा समीर मेहर, प्रियंका रथ और ऑल्विन फ्रांसिस को ‘अध्यक्ष स्वर्ण पदक’ से नवाजा गया। वहीं, मान्या सिंह को सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण प्रदर्शन के लिए ‘आईआईएम संबलपुर स्वर्ण पदक’ प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में एडोबी इंडिया की उपाध्यक्ष प्रतिमा मोहापात्रा ने विद्यार्थियों को बदलते वैश्विक परिवेश के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया।
राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभंपति ने संस्थान की प्रशंसा करते हुए कहा कि आईआईएम संबलपुर सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक का एक अनूठा संगम है। उन्होंने विशेष रूप से ‘मास्टर वीवर’ कार्यक्रम और महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल को सराहा। उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय रैंकिंग (NIRF 2025) में 16 स्थानों की प्रभावशाली छलांग और डेटा साइंस व एआई जैसे भविष्योन्मुखी पाठ्यक्रमों की शुरुआत संस्थान की दूरदर्शी सोच को दर्शाती है।
संस्थान के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करते हुए निदेशक प्रो. महादेव प्रसाद जायसवाल ने बताया कि आईआईएम संबलपुर अगले दो वर्षों में अपनी अवसंरचना को दोगुना करने और आगामी कुछ वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या 2000 तक पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि एआई-आधारित कक्षा शिक्षण के नवाचार के कारण वैश्विक स्तर पर आईआईएम संबलपुर की पहचान हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के समकक्ष की जा रही है। संचालन मंडल के प्रभारी अध्यक्ष प्रो. चंदन चौधरी ने भी प्रबंधन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समावेश के लिए संस्थान के अग्रणी प्रयासों की सराहना की।
