निरीक्षण में सामने आईं कई अनियमितताएं, रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की हुई जांच
भोपाल। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर बुधवार को उस समय हलचल मच गई, जब भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिला आबकारी कार्यालय का अचानक औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर के अचानक कार्यालय पहुंचने से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई।
बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कार्यालय की कार्यप्रणाली, अभिलेखों, लंबित प्रकरणों तथा विभागीय व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कुछ बिंदुओं पर अनियमितताएं सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद संबंधित रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की जांच की गई।
अचानक पहुंचने से खुली व्यवस्था की परतें?
औचक निरीक्षण का उद्देश्य केवल कार्यालय की मौजूदगी और साफ-सफाई देखना नहीं, बल्कि विभागीय कामकाज की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना भी माना जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि नियमित निरीक्षण के बजाय अचानक जांच में कमियां सामने आती हैं, तो विभागीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
सूत्रों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान कुछ दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड को भी देखा गया। हालांकि, कौन-कौन सी अनियमितताएं मिलीं और किन अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी, इसका स्पष्ट विवरण प्रशासन की ओर से सामने आना बाकी है।
