वसुधैव कुटुंबकम् के हम सब सदस्य हैं” — दत्तात्रेय होसबाले
भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है,
भारत उठ रहा है और उठना चाहिए
भारत के आगे बढ़ने से मानवता के लिए कई अच्छाइयां होंगी
आज भारत हर क्षेत्र में विश्व में अपना मुकाम हासिल कर रहा है
अंतरिक्ष हो, खेल हो या कोई अन्य क्षेत्र— दुनिया जिज्ञासा से भारत की ओर देख रही है
संघ का शताब्दी वर्ष पूरा हो रहा है, लेकिन संघ का काम रुकने वाला नहीं
संघ का कार्य अनवरत जारी रहेगा और भारत की यात्रा भी रुकने वाली नहीं है
भारत कई संकटों से निकलकर आया है,“भारत मृत्युंजय बनकर निकला है”
“भारत अविनाशी राष्ट्र है” — दत्तात्रेय होसबाले
दुनिया की कई सभ्यताएं आज संग्रहालयों में हैं, लेकिन भारत की सभ्यता आज भी जीवंत है
भारत ने कई युद्ध और संकट देखे, लेकिन अपनी संस्कृति और सभ्यता को नहीं भूला
भारत का विकास सिर्फ भौतिक विकास नहीं है
भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीवंत और विजयी समाज है
संघर्ष के समय भारतीय समाज *एकजुट होकर उसका सामना करता है
गुलामी के काल में समाज में कई *कुरीतियां आईं आज हमें अपनी **संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को फिर से समझने की जरूरत है
“कभी हम विश्वगुरु हुआ करते थे, हमारा समृद्धशाली इतिहास है”* — दत्तात्रेय होसबाले
