नवजात शिशुओं में जन्मजात हृदय रोग (जन्म से मौजूद हृदय की संरचनात्मक बीमारी) की जल्द पहचान और उपचार को मजबूत करने के उद्देश्य से एम्स भोपाल के बाल रोग विभाग ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश के सहयोग से दो दिवसीय राज्य स्तरीय 2डी इकोकार्डियोग्राफी (हृदय की इकोतरंग जांच) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य था — प्रदेश भर की विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) में कार्यरत शिशु रोग विशेषज्ञों की हृदय जांच संबंधी दक्षता को बेहतर बनाना।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) नरेन्द्र कोतवाल (रि) ने किया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण मध्य प्रदेश भर की एसएनसीयू में कार्यरत शिशु रोग विशेषज्ञों की क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा और जन्मजात हृदय रोग की शुरुआती पहचान की क्षमता को मजबूत करेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश की उप निदेशक डॉ. हिमानी यादव ने बताया कि यह पहल नवजातों में जन्मजात हृदय रोग की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेफरल और उचित उपचार दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे नवजात मृत्यु दर और बीमारी की दर को घटाने में मदद मिलेगी। आयोजन सचिव डॉ. अंबर कुमार ने एम्स भोपाल के नेतृत्व, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश, संकाय सदस्यों और सभी प्रतिभागियों का उनके सहयोग, प्रोत्साहन और उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
दो दिवसीय इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को 2डी इकोकार्डियोग्राफी को नवजातों में जन्मजात हृदय रोग की जांच और शुरुआती पहचान के लिए एक बिंदु-देखभाल (पॉइंट-ऑफ-केयर) जांच उपकरण के रूप में उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में व्यावहारिक अभ्यास और निरंतर कौशल विकास के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया, ताकि शिशु रोग विशेषज्ञ हृदय जांच में अधिक आत्मविश्वास और दक्षता हासिल कर सकें।
