मुंबई: आत्मनिर्भर भारत और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य को गति देने के लिए पुणे स्थित सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (COEP Tech) और जेएसडब्ल्यू ग्रुप की कंपनी ‘जेएसडब्ल्यू प्रोजेक्ट्स’ ने एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत पुणे के चिखली रिसर्च पार्क में ₹800 करोड़ से अधिक के संयुक्त निवेश से ‘एडवांस्ड बैटरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर’ स्थापित किया जाएगा। यह पुणे के किसी अकादमिक परिसर में स्थापित होने वाला पहला स्वदेशी लिथियम-आयन सेल तकनीक अनुसंधान केंद्र होगा।
यह परियोजना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में लिथियम-आयन और सोडियम-आयन जैसी उन्नत केमिस्ट्री वाले सेल के डिजाइन और प्रोटोटाइप पर काम होगा, जबकि दूसरे चरण में इसे 100 से 600 Ah क्षमता वाले सेल के निर्माण और वैलिडेशन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह साझेदारी भारत के बैटरी सप्लाई चेन में चीन जैसे देशों पर निर्भरता को कम करने, भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बैटरी विकसित करने और गीगा-स्केल उत्पादन से पहले विनिर्माण जोखिमों को कम करने में मदद करेगी। इससे महाराष्ट्र में बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े 1,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
साझेदारी पर विचार साझा करते हुए जेएसडब्ल्यू ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा, “सेल नया तेल है। जिस तरह तेल ने पिछली सदी को ऊर्जा दी, उसी तरह इस सदी में बैटरी सेल ईवी और ग्रिड को ऊर्जा देंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि 170 साल पुरानी इंजीनियरिंग विरासत वाले सीओईपी टेक के साथ यह सहयोग भारत में क्लीन एनर्जी भविष्य के निर्माण के लिए देश में ही सेल डिजाइन और टेस्ट करने में मदद करेगा। वहीं, सीओईपी के कुलपति प्रो. सुनील भिरुड ने कहा कि यह उद्योग-अकादमिक पहल आयातित बैटरियों का मजबूत विकल्प तैयार करने और छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों पर सीखने का अभूतपूर्व अवसर प्रदान करेगी।
