मुंबई : भारत की तेजी से गिरती प्रजनन दर (Fertility Rate) और कार्यबल में महिलाओं की कम हिस्सेदारी देश के ‘विकसित भारत 2050’ के लक्ष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐक्सिस बैंक द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट “द मिसिंग हाफ: वुमेन एंड इंडिया’ज़ ग्रोथ चैलेंज” के अनुसार, यदि भारत को बूढ़ा होने से पहले अमीर बनना है, तो अगले 25 वर्षों तक 7% की विकास दर बनाए रखने के लिए वेतनभोगी कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को वर्तमान 47% से बढ़ाकर 60% करना होगा।
यह रिपोर्ट 42 शहरों की लगभग 11,000 कॉलेज-शिक्षित महिलाओं के सर्वे और गहन डेटा विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि भारत में फिलहाल G20 देशों की तुलना में महिला श्रम बल भागीदारी सबसे कम है। वर्तमान में कार्यबल में शामिल 61% महिलाएं कृषि में हैं और लगभग 60% अनौपचारिक क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जहाँ सामाजिक सुरक्षा का अभाव है।
प्रमुख चुनौतियां: ‘मैरिज’ और ‘मदरहुड’ पेनल्टी
रिपोर्ट में उन सामाजिक और ढांचागत बाधाओं को रेखांकित किया गया है जो महिलाओं को करियर से दूर रखती हैं:
- विवाह और मातृत्व: भारत में शादी के बाद कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 20% गिर जाती है। माँ बनने के बाद यह गिरावट और भी बढ़ जाती है, जिसे ‘मदरहुड पेनल्टी’ कहा गया है।
- सुरक्षा और आवागमन: सर्वे में शामिल 61% महिलाओं ने कार्यबल में प्रवेश न कर पाने का सबसे बड़ा कारण सुरक्षा और मोबिलिटी (आने-जाने की असुविधा) को बताया।
- शिक्षित कार्यबल का अभाव: लगभग 125 मिलियन शिक्षित महिलाएं वर्तमान में कार्यबल से बाहर हैं। ग्रेजुएशन के बाद 60% महिलाएं वेतनभोगी काम से बाहर रहना चुनती हैं।
विकास के लिए अनिवार्य बदलाव
ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, “हमारे पास समय कम है और हमें ‘सभी हाथों की जरूरत’ है। घरेलू उत्पादकता और शिक्षा में हमने प्रगति की है, लेकिन अब हमें श्रम की मांग बढ़ाने, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और ऑफिसों में लचीलापन लाने की जरूरत है ताकि ‘मिसिंग हाफ’ को कार्यबल में वापस लाया जा सके।”
वहीं, बैंक की एचआर हेड राजकमल वेम्पति ने कहा कि 125 मिलियन शिक्षित महिलाओं को किनारे से हटाकर मुख्यधारा में लाना सबसे बड़ा आर्थिक लीवर है। संगठनों को करियर के रास्तों को फिर से डिजाइन करना होगा ताकि महिलाएं बिना किसी आर्थिक नुकसान के काम में वापसी कर सकें।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और मांग
- रोजगार के अवसर: गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देना जहाँ महिलाओं के लिए अधिक अवसर हों।
- ढांचागत समर्थन: चाइल्डकेयर (बच्चों की देखभाल), सुरक्षित परिवहन और काम के लचीले घंटों को आधिकारिक पहचान देना।
- री-एंट्री पाथवे: करियर ब्रेक के बाद वापसी करने वाली महिलाओं के लिए कौशल विकास और आसान भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाना केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक तरक्की के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।
