भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसे आमतौर पर बुनियादी ढांचे और आर्थिक आंकड़ों से मापा जाता है, लेकिन गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के चेयरपर्सन बुर्जिस गोदरेज के अनुसार पशुओं की सेहत इस विकास का एक महत्वपूर्ण और अनदेखा पैमाना है। भारत में बढ़ता जीवनस्तर और खान-पान में बदलाव प्रोटीन की मांग को तेजी से बढ़ा रहा है, जहां देश का प्रोटीन बाजार 2024 के 38,247 करोड़ रुपये से बढ़कर 2033 तक 1.36 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। हालांकि, भारत में वर्तमान प्रति व्यक्ति दैनिक प्रोटीन खपत केवल 70 ग्राम है, जो विकसित देशों (124-125 ग्राम) की तुलना में काफी कम है और इसका बड़ा हिस्सा अब भी अनाज से आता है। दुनिया की सबसे बड़ी पशुधन आबादी होने के बावजूद, पशुओं की खराब सेहत और बीमारियों के कारण देश को हर साल 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान होता है। बुर्जिस गोदरेज का तर्क है कि पशुओं की संख्या बढ़ाने के बजाय टीकाकरण, बायो-सिक्योरिटी और गुणवत्तापूर्ण पोषण के माध्यम से उनकी सेहत व उत्पादकता सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके अलावा, डेयरी, मांस और पोल्ट्री सेक्टर को संगठित ब्रांड्स के रूप में विकसित करने से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा। बेहतर पोषण एडिटिव्स के उपयोग से मीथेन उत्सर्जन में 45% तक की कमी लाकर पर्यावरण को भी सुरक्षित किया जा सकता है। तेजी से बढ़ते पेट फूड बाजार में आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू क्षमता बढ़ाना भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए आवश्यक है, क्योंकि देश की वास्तविक प्रगति अंततः उसके लोगों और पशुधन की सेहत पर ही निर्भर करती है।
विकसित भारत की नींव पशुओं की संख्या से ज्यादा उनकी सेहत पर टिकेगी: बुर्जिस गोदरेज
