नागौर, राजस्थान में अतिरिक्त 1.00 MTPA ग्राइंडिंग यूनिट के चालू होने से कंपनी की कुल स्थापित ग्राइंडिंग क्षमता 25.10 MTPA हुई
मुंबई : भारत की अग्रणी ग्रीन सीमेंट उत्पादकों में से एक और विविध जेएसडब्ल्यू ग्रुप (JSW Group) का हिस्सा, जेएसडब्ल्यू सीमेंट (JSW Cement) ने आज नागौर, राजस्थान में अतिरिक्त 1.00 MTPA सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट को सफलतापूर्वक चालू करने की घोषणा की। यह शुरुआत कंपनी की विकास रणनीति में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
इस नई यूनिट के चालू होने के साथ ही जेएसडब्ल्यू सीमेंट की कुल सीमेंट ग्राइंडिंग क्षमता बढ़कर 25.10 MTPA हो गई है, जबकि इसके संयुक्त उद्यम (JSW Cement FZC) की क्लिंकर क्षमता सहित इसकी कुल क्लिंकर निर्माण क्षमता 9.74 MTPA पर पहुंच गई है।
जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने मार्च 2026 में नागौर इंटीग्रेटेड प्लांट के साथ उत्तर भारत में अपने परिचालन की शुरुआत की थी, जिसमें 3.30 MTPA क्लिंकराइजेशन यूनिट और 2.50 MTPA सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट शामिल थी। अब अतिरिक्त 1.00 MTPA सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट के शुरू होने से नागौर प्लांट की कुल सीमेंट ग्राइंडिंग क्षमता बढ़कर 3.50 MTPA हो गई है। इससे राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सीमेंट की बढ़ती मांग को पूरा करने की कंपनी की क्षमता और मजबूत होगी। इस विस्तार का वित्तपोषण इक्विटी और दीर्घकालिक ऋण (लॉन्ग-टर्म डेट) के रणनीतिक मिश्रण के माध्यम से किया गया है।
30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान, जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने नागौर इंटीग्रेटेड प्लांट में अल्टरनेट फ्यूल हैंडलिंग सिस्टम और वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम (WHRS) को भी चालू किया है।
इस अवसर पर घोषणा करते हुए जेएसडब्ल्यू सीमेंट के सीईओ श्री नीलेश नरवेकर ने कहा: “नागौर में अतिरिक्त 1.00 MTPA ग्राइंडिंग क्षमता का संचालन हमारे लिए एक प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकता है और यह उत्तर भारत में जेएसडब्ल्यू सीमेंट के विस्तार को गति देगा। हम क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और राजस्थान, हरियाणा, पंजाब व एनसीआर क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए तत्पर हैं। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि कंपनी ने अपनी परियोजना निष्पादन क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए इस ग्राइंडिंग यूनिट को अपेक्षित समय सीमा के भीतर चालू कर दिया है। इसके अलावा, अल्टरनेट फ्यूल हैंडलिंग सिस्टम और वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम (WHRS) से आगे चलकर हमारी उत्पादन लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है।”
