- SIR पर संग्राम से गरमाई सियासत, तोते की दबी गर्दन तो राजा की जान पड़ी आफ़त
- राहुल का सीधा वार : ‘वोट चोरी’ के सबूत देंगे; INDIA गठबंधन का ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार का ऐलान
चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर छिड़ी राजनीतिक जंग अब सड़क से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है… SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते टकराव के बीच शुक्रवार को INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर चार सूत्रीय ज्ञापन सौंपा.. सबसे बड़ा निशाना मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार रहे…, जिनके इस्तीफे की मांग को विपक्ष ने अपने आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बना दिया है…।
राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पोस्ट और बयान के जरिए इस लड़ाई को और धार दे दी…. उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को राष्ट्रपति के सामने रखा गया और राष्ट्रपति की ओर से उनसे सबूत पेश करने को कहा गया… राहुल गांधी ने कहा कि अब INDIA गठबंधन सारे पुख्ता सबूत राष्ट्रपति के सामने रखेगा और संवैधानिक तरीके से लड़ाई जारी रखेगा…!
सवाल अब सिर्फ SIR का नहीं, चुनावी भरोसे का..
विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव और SIR की प्रक्रिया ने चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…. INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में ज्ञानेश कुमार को हटाने, SIR को तत्काल रोकने, कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं की बहाली, चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी और हालिया चुनावों की समीक्षा जैसी मांगें रखी हैं…यानी सियासी लड़ाई अब ‘कौन जीता-कौन हारा’ से आगे बढ़कर इस सवाल पर आ गई है कि मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और परिणाम तक पूरी चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा…?
विपक्ष इसे लोकतंत्र की बुनियाद से जोड़ रहा है.., जबकि चुनाव आयोग राहुल गांधी के कुछ आरोपों को भ्रामक बता चुका है… खासकर Form 6 को लेकर आयोग ने कहा है कि मूल वैधानिक फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया था …और SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा-पत्र प्रक्रिया का हिस्सा था… आयोग ने यह भी कहा है कि बिहार SIR को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था…।
ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे का दबाव, आंदोलन सड़क से संसद तक…!
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर INDIA गठबंधन पिछले कई दिनों से दिल्ली में आंदोलन कर रहा है… 6 अक्टूबर को ECI कार्यालय की ओर मार्च के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था… इसके बाद आंदोलन राजघाट तक पहुंचा और अब राष्ट्रपति भवन में ज्ञापन तक पहुंच चुका है…विपक्ष के लिए यह महज एक अधिकारी के इस्तीफे का सवाल नहीं रह गया है… SIR, मतदाता सूची, EVM बनाम बैलेट पेपर और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता….इन सभी मुद्दों को जोड़कर INDIA गठबंधन इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है…।
आयोग बनाम विपक्ष – किसके पास कितना दम..?
यहां सबसे बड़ा सवाल आरोपों की राजनीतिक गूंज नहीं, बल्कि उनके प्रमाण का है… राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद साफ कहा कि अब सबूत पेश किए जाएंगे… यानी विपक्ष ने अपनी अगली राजनीतिक रणनीति का संकेत दे दिया है…सड़क का आंदोलन अब दस्तावेजों, मतदाता सूची के आंकड़ों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े प्रमाणों की लड़ाई में बदल सकता है…दूसरी ओर चुनाव आयोग आरोपों को खारिज कर रहा है…ऐसे में आने वाले दिनों में असली परीक्षा दोनों पक्षों की होगी….।
विपक्ष के दावों की प्रमाणिकता और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण की विश्वसनीयता…
फिलहाल दिल्ली की राजनीति में एक बात साफ दिखाई दे रही है…SIR ने चुनावी राजनीति को सिर्फ मतदाता सूची के विवाद तक सीमित नहीं रखा.., बल्कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, उसकी जवाबदेही और लोकतंत्र में जनता के भरोसे को केंद्र में ला खड़ा किया है…अब लड़ाई नारे से आगे है…सबूत बनाम सफाई की लड़ाई और इस लड़ाई का अगला मैदान राष्ट्रपति भवन से लेकर अदालत और जनता की अदालत तक हो सकता है….।
