एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट वकीलों की सुरक्षा, सम्मान और पेशेवर स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य वकीलों के खिलाफ हिंसा, धमकियों, उत्पीड़न और झूठे मुकदमों को रोकना और उन्हें उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रमुख बिंदु और आवश्यकता :-
हिंसा और धमकियों से सुरक्षा: वकीलों पर शारीरिक हमले, गंभीर चोट पहुंचाने या आपराधिक बल प्रयोग करने को कानूनन अपराध माना जाता है।
झूठे मुकदमों पर रोक :- वकीलों को परेशान करने के इरादे से झूठी, दुर्भावनापूर्ण या कष्टप्रद शिकायतें/मुकदमे दर्ज करने वालों के लिए सजा (जैसे जेल और जुर्माना) का प्रावधान होता है।
गिरफ्तारी से पूर्व सुनवाई :- कुछ प्रावधानों के अनुसार, पुलिस किसी वकील के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर उसे तुरंत गिरफ्तार या जांच नहीं कर सकती, बल्कि इसके लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
सामाजिक सुरक्षा :- कई राज्य इस अधिनियम में वकीलों के लिए स्वास्थ्य बीमा, आपातकालीन सहायता और शिकायत निवारण समिति का भी प्रावधान शामिल करते हैं।
वर्तमान स्थिति (राज्यवार) :- राजस्थान :- यह अधिनियम पारित करने वाला पहला राज्य था, जिसने २०२३ में राजस्थान एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल लागू किया था।
तेलंगाना :- वर्ष २०२६ में तेलंगाना एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल पेश किया गया है, जो काफी विस्तृत है।
अन्य राज्य :- उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में बार काउंसिल और वकील संघ लंबे समय से इस एक्ट को अपने राज्य में लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन व ज्ञापन सौंप रहे हैं।
हम भोपाल, मध्यप्रदेश के अधिवक्ता भी चाहते हैं कि शीघ्र अतिशीघ्र एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट सम्पूर्ण भारत वर्ष में लागू हो।
