स्वदेशी मेला केवल मेला नहीं, देश को मजबूत करने का भाव है : पंकज जोशी

Spread the love

भोपाल। स्वदेशी मेला केवल घूमने, खाने-पीने और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि देश को मजबूत करने का भाव है। यहां से खरीदी गई छोटी-से-छोटी वस्तु भी देश को मजबूत करने में योगदान देती है। यह बात मध्य प्रदेश शासन के खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी ने स्वदेशी मेले के पांचवें दिन 28 अक्टूबर को कही।

स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के समन्वय से शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर, भोपाल में 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक आयोजित किया जा रहा है। 

पंकज जोशी ने कहा कि आमतौर पर मेले में लोग घूमने, खाने-पीने और मनोरंजन के लिए आते हैं, लेकिन स्वदेशी मेला एक भावना है। यहां से खरीदी गई प्रत्येक वस्तु देश को मजबूत करने में योगदान देती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि उनके हाथों में दिए गए स्मार्टफोन का उपयोग स्वदेशी को आगे बढ़ाने और उसका प्रचार करने के लिए भी किया जाना चाहिए।

स्वदेशी खरीदने से किसान, मजदूर और छोटे उद्योगों को मिलता है सहारा: सत्येंद्र भूषण सिंह

मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ने कहा कि मेले में केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं आना चाहिए, बल्कि अपने साथ दूसरे लोगों को भी लाना चाहिए। जब देश गुलाम था, तब महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों की होली जलवाकर स्वदेशी को बढ़ावा दिया और खादी का प्रयोग करने का आह्वान किया था। देश के कुम्हारों द्वारा बनाए गए बर्तन पहले भी अच्छे थे और आज भी अच्छे हैं। जब कोई व्यक्ति स्वदेशी सामान खरीदता है, तो उससे किसान, मजदूर और लघु उद्योगों से जुड़े लोगों का हौसला बढ़ता है।

उन्होंने देश के बुनकरों द्वारा बनाई गई दरियों और किसानों द्वारा उगाए गए मोटे अनाज से तैयार बिस्कुट जैसे उत्पादों का उल्लेख किया। सिंह ने कहा कि दीपावली आने वाली है। ऐसे में स्वदेशी वस्तुएं खरीदकर इन्हें बढ़ावा दिया जा सकता है। 4 नवंबर तक भोपाल के अधिक से अधिक लोगों से मेले में आने और दीपावली के लिए स्वदेशी सामान खरीदकर मध्य प्रदेश और भारत को मजबूत करने की अपील की।

बच्चों को स्वदेशी का महत्व समझाना जरूरी: सोबरन सिंह तोमर

लघु उद्योग भारती के मध्य भारत प्रांत अध्यक्ष सोबरन सिंह तोमर ने कहा कि स्वदेशी अपनाने के लिए अपने परिजनों को भी प्रेरित करना होगा। यदि लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि कौन-सी वस्तुएं खरीदें, तो वे मेले में आकर उत्पादों को देख सकते हैं। बच्चों को भी स्वदेशी का महत्व समझाना चाहिए, क्योंकि वे देश का भविष्य हैं और देश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उन्हीं की है।

तोमर ने कहा कि भारत को पहले सोने की चिड़िया कहा जाता था। इसका कारण यह था कि यहां वस्तुओं का निर्माण होता था और उनका निर्यात विदेशों में किया जाता था। इसके बदले सोना भारत आता था। स्वदेशी को अपनाकर देश को फिर से आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा सकता है।

स्वदेशी को अपनी आदतों और व्यवहार में उतारें: रामेंद्र

सेवा भारती के अखिल भारतीय अधिकारी एवं रेडक्रॉस सोसायटी से जुड़े रामेंद्र ने कहा कि स्वदेशी केवल एक विचार नहीं, बल्कि इसे अपने जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाने की बात है। आजादी से लेकर रोजमर्रा के जीवन तक स्वदेशी का महत्व रहा है। अपनी भाषा का प्रयोग करना भी स्वदेशी भावना का हिस्सा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘मम्मी’ की जगह ‘माताजी’ और ‘पापा’ की जगह ‘पिताश्री’ कहना भी अपनी भाषा और परंपरा को अपनाने का एक तरीका है। स्वदेशी को केवल सामान खरीदने तक सीमित न रखकर अपनी आदतों और व्यवहार में भी शामिल करना चाहिए।

मेले की प्रस्तावना रखते हुए सह संयोजक दीपक वर्मा ने कहा कि भोपाल में दूसरे वर्ष यह मेला भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और देश को मजबूत करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

स्वदेशी मेले में महापुरुषों पर नारा लेखन प्रतियोगिता, आदिवासी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं

 मेले के चौथे दिन बुधवार को महापुरुषों पर नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने महापुरुषों के जीवन, विचारों और देश के लिए उनके योगदान पर आधारित नारे प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रतिभागियों को महापुरुषों के विचारों से परिचित कराना था।

शाम को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत ‘हम देश की पहचान—आदिवासी’ विषय पर विभिन्न प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में बुंदेली लोक नृत्य, समूह नृत्य ‘राम आएंगे आएंगे राम’ तथा लिपिका डांस ग्रुप की ओर से शिव वंदना, काली अवतार और बंगाल के धुनुची नृत्य की प्रस्तुतियां भी हुईं। इसके बाद नीलकंठ म्यूजिकल ग्रुप ने संगीतमय संध्या प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, देवेंद्र रावत, भोपाल बार एसोसिएशन अध्यक्ष, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और विनय कुमार सोनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

admin1

admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *