रॉयल प्रेस क्लब ने डीजीपी से की शिकायत, बिना जांच और ठोस प्रमाण के कार्रवाई का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग
भोपाल। पत्रकारों के अधिकार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले को लेकर रॉयल प्रेस क्लब ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक को शिकायत भेजी है। शिकायत में पत्रकार प्रवेश गौतम के विरुद्ध इंदौर क्राइम ब्रांच में दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
रॉयल प्रेस क्लब के अध्यक्ष पंकज भदौरिया द्वारा दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पत्रकार के खिलाफ प्रकाशित खबर के आधार पर बिना पर्याप्त जांच और ठोस प्रमाण के मामला दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया है कि पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाए गए तथ्यों की जांच किए बिना आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से गंभीर विषय है।
शिकायत में उठाए गए प्रमुख बिंदु
शिकायत के अनुसार—
जिस व्यक्ति के आधार पर पैसों की मांग का आरोप लगाया गया है, उसके संबंध में कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है। शिकायत में उसके कथित बयान को भी प्रमाण के अभाव में निर्भर बताया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि पैसों की मांग की तारीख 16 सितंबर 2025 बताई गई है, जबकि एफआईआर लगभग एक वर्ष बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। इसे शिकायतकर्ता ने जांच का विषय बताया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि जिस खबर को रोकने के लिए पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है, वह खबर 20 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हो चुकी थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि एफआईआर में जिस खबर को लेकर आरोप लगाया गया है, उसका उल्लेख भी स्पष्ट रूप से नहीं किया गया।
दस्तावेजों की कथित चोरी के संबंध में शिकायत में दावा किया गया है कि खबर में जिन दस्तावेजों का उल्लेख था, वे शिकायतकर्ताओं अथवा उनकी कंपनी से संबंधित नहीं होने के प्रमाण उपलब्ध हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेजों की चोरी का आरोप तो लगाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित दस्तावेज किस तारीख के हैं। इसे शिकायतकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्य बताया है।
रॉयल प्रेस क्लब का आरोप है कि पुलिस को शिकायत मिलने के बाद बिना पर्याप्त विवेचना के धाराएं लगाकर एफआईआर दर्ज की गई, जिसे शिकायत में अनुचित बताया गया है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि खबर में उल्लेखित कुछ तथ्यों को शिकायतकर्ता ने स्वयं अपनी शिकायत में स्वीकार किया है तथा संबंधित व्यक्ति के एक कंपनी में कार्यरत होने का प्रमाण भी होने की बात कही गई है।
शिकायत के अनुसार, पत्रकारिता से संबंधित निर्धारित मानकों के संदर्भ में भी शिकायत में कई तथ्य स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पत्रकार को बदनाम करने के उद्देश्य से खबर को लेकर गलत धारणा बनाने का प्रयास किया गया तथा खबर को पत्रकार की व्यक्तिगत पहचान से जोड़ने की कोशिश की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पैसों की मांग संबंधी घटना को भोपाल की घटना बताया गया, जबकि संबंधित खबर 6 सितंबर 2026 को प्रकाशित होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना भोपाल में होने के बावजूद शिकायत भोपाल में नहीं दी गई।
डीजीपी से निष्पक्ष जांच की मांग
रॉयल प्रेस क्लब ने शिकायत में कहा है कि इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के पीछे किसी प्रकार के दबाव अथवा अन्य उद्देश्य की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए। क्लब ने मांग की है कि एफआईआर पर त्वरित प्रभाव से रोक लगाने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की तथ्यपरक एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं तो शिकायतकर्ताओं के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
