सैनिकों के पुनर्वास और कौशल विकास में क्रिस्प की भूमिका सराहनीय: सुकृति लिखी

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सैनिकों के पुनर्वास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में सेंटर फॉर रिसर्च एंड इंडस्ट्रियल स्टाफ परफॉर्मेंस (क्रिस्प), भोपाल में बुधवार को रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW) की सचिव सुकृति लेखी ने दौरा किया|

क्रिस्प के कार्यों से प्रभावित हुईं सुकृति लिखी

मुख्य अतिथि सुकृति लिखी ने पुनर्वास महानिदेशालय (डी.जी.आर) के प्रशिक्षणार्थियों से बातचीत की और उनके प्रशिक्षण अनुभवों को जाना। उन्होंने क्रिस्प में संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा, “डी.जी.आर से जुड़े लोग इस संस्थान की तारीफ करते हैं। यहां आकर जब मैंने कार्यक्रमों का जायजा लिया, तो मैं भी प्रभावित हुई कि क्रिस्प वास्तव में इस क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रहा है।” उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

अनुशासन, मेहनत और अपनी क्षमताओं को पहचानना जरूरी: मेजर जनरल एसबीके सिंह

महानिदेशक, पुनर्वास महानिदेशालय मेजर जनरल एसबीके सिंह, एसएम ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पूर्व सैनिक विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मेहनत, अनुशासन और कौशल के बल पर बेहतर करियर बना सकते हैं और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग का पूरा लाभ उठाने और प्रशिक्षण के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट पर भी जोर: बसंत कुर्रे

क्रिस्प के प्रबंध संचालक बसंत कुर्रे ने संस्थान में संचालित विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा, “क्रिस्प के प्रबंध संचालक बसंत कुर्रे ने बताया कि संस्थान द्वारा डी.जी.आर. के अंतर्गत अब तक 600 से अधिक सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण के साथ उनके प्लेसमेंट के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में सीनियर ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, बिल्डिंग ऑटोमेशन स्पेशलिस्ट, सीनियर सी.एन.सी. (प्रोग्रामिंग एंड ऑपरेशन) एग्जीक्यूटिव, 2डी एनीमेशन एंड मोशन ग्राफिक्स तथा ग्राफिक डिजाइन जैसे कोर्स शामिल हैं।”

पूर्व सैनिकों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना क्रिस्प की प्राथमिकता: अमोल वैद्य

क्रिस्प के संचालक अमोल वैद्य ने कहा, “ क्रिस्प का प्रयास है कि उन्हें आधुनिक तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उनके अनुभव को नई दिशा दी जाए। डी.जी.आर. के साथ मिलकर संचालित किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद नए करियर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”

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