मंडी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी (IIT Mandi) ने जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संस्थान ने अपने ‘भारतीय जलवायु सूचना अन्वेषक’ (INCLINE) प्लेटफॉर्म पर “वॉटरशेडएआई” (WatershedAI) नामक एक एआई-संचालित (AI-driven) एप्लीकेशन लॉन्च किया है। यह उपकरण शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और आम नागरिकों के लिए भारत के किसी भी जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) की विस्तृत रिपोर्ट मात्र 3 से 8 मिनट के भीतर तैयार कर सकता है।
यह अनूठा मंच पूरी तरह से निःशुल्क है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 19 अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशन-स्तरीय (Publication-grade) वैज्ञानिक रिपोर्ट प्रदान करता है।
अत्याधुनिक तकनीक और बहुभाषी क्षमता आईआईटी मंडी की “हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला” द्वारा विकसित यह टूल जल विज्ञान मॉडलिंग, डीप लर्निंग (Ghen Adhigam) और बहुभाषी एआई का उपयोग करता है। ‘WatershedAI’ अपनी रिपोर्ट को हिंदी, तमिल, बंगाली, तेलुगु, मराठी, गुजराती जैसी प्रमुख भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी, चीनी, जापानी, स्पेनिश, फ्रेंच और जर्मन जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं सहित कुल 19 भाषाओं में उपलब्ध कराता है।
실험실 प्रमुख डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया, “हमारा मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक जल विज्ञान अनुसंधान और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया के बीच की दूरी को मिटाना है। यह टूल मिट्टी की स्थिति, भूमि उपयोग, जलवायु के ऐतिहासिक और अनुमानित आंकड़ों, सूखा सूचकांकों और जल-उपज मॉडल का एक समेकित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्रत्येक रिपोर्ट पूरी तरह सत्यापित और प्रमाणित है।”
जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर विकास इस टूल को देश के दूर-दराज के इलाकों और सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर बेहद सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। इसके सह-विकासकर्ता और पीएचडी शोधार्थी श्री सिद्धिक ने बताया कि इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के किसी भी हिस्से का छात्र या योजनाकार वैज्ञानिक गुणवत्ता से समझौता किए बिना अपनी मातृभाषा में सटीक जानकारी पा सके। वहीं, इसके वेब विकासकर्ता और बीटेक छात्र पीयूष पनपालिया ने बताया कि मानचित्र-आधारित निकास चयन (Map-based outlet selection) जैसी सुविधाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि यह हर प्रकार के डिवाइस पर सुचारू रूप से काम कर सके।
उपयोगिता और उपलब्धता यह टूल सरकारी एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। केवल एक क्लिक के जरिए उपयोगकर्ता किसी भी नदी बेसिन के जल निकासी प्रतिरूप, सूखे के इतिहास, चरम मौसम की घटनाओं और भविष्य में जल की उपलब्धता से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। यह नवाचार देश के ‘जल शक्ति’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूत करेगा।
यह अभूतपूर्व सुविधा अब आईआईटी मंडी के इनक्लाइन (INCLINE) प्लेटफॉर्म पर सभी के लिए लाइव है, जिसे incline.iitmandi.ac.in पर जाकर एक्सेस किया जा सकता है।
