मंडी : हिमाचल प्रदेश के सुरम्य कमांद परिसर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी ने तृतीय अंतरराष्ट्रीय “माइंड, ब्रेन एंड कॉन्शसनेस कॉन्फ्रेंस (एमबीसीसी 2026)” का सफलतापूर्वक आयोजन किया है. यह प्रतिष्ठित अंतरविषयक सम्मेलन संस्थान के ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र’ (IKSMHHA) द्वारा आयोजित किया गया, जिसे भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) प्रभाग का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है.
इस चार दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य चेतना (Consciousness), संज्ञान (Cognition), मानसिक स्वास्थ्य और मानव कल्याण जैसे गूढ़ विषयों पर आधुनिक विज्ञान तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित करना रहा.
वैश्विक भागीदारी और शोध का महाकुंभ
इस वर्ष के सम्मेलन में अनुसंधान और शैक्षणिक आदान-प्रदान के व्यापक स्तर को देखा गया:
- दिग्गजों की सहभागिता: सम्मेलन में भारत और विदेशों से 500 से अधिक शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया.
- सघन वैज्ञानिक सत्र: चार दिनों के दौरान 290 से अधिक शोध पत्र (Research Papers) और 100 से अधिक पोस्टर प्रस्तुत किए गए. इसके अतिरिक्त 18 मुख्य व्याख्यान, 7 आमंत्रित व्याख्यान और 3 गहन पैनल चर्चाओं का आयोजन हुआ.
- प्रमुख विषय: विचार-विमर्श के मुख्य केंद्रों में तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience), संज्ञानात्मक विज्ञान, मनोविज्ञान, योग, ध्यान, आयुर्वेद, संस्कृत अध्ययन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मानसिक स्वास्थ्य जैसे समकालीन व पारंपरिक विषय शामिल रहे.
महान सांस्कृतिक विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति
सम्मेलन के उद्घाटन और सांस्कृतिक सत्रों ने भारतीय विरासत की अनूठी झलक पेश की:
- पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम: देश की प्रख्यात भरतनाट्यम नृत्यांगना और शोधकर्ता उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं. उन्होंने इस अवसर पर अपने दल के साथ एक बेहद मनमोहक और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी.
- पद्म भूषण पंडित अजय चक्रवर्ती: प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक 4 जून 2026 को होने वाले सत्र में अपना मुख्य व्याख्यान (Keynote Address) प्रस्तुत करेंगे और शास्त्रीय संगीत की एक विशेष प्रस्तुति से श्रोताओं को आनंदित करेंगे.
महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन
इस वैश्विक मंच पर अनुसंधान और ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं शोध प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जिनमें प्रमुख हैं:
- एमबीसीसी 2023 और 2025 की आधिकारिक अनुसंधान कार्यवाहियां (Conference Proceedings).
- “कर्म योग” – प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा.
- “भारतीय ज्ञान परंपराएँ : एक परिचय” – प्रोफेसर गौतम आर. देसाई एवं टीम.
- “होली तुलसी कॉन्शसनेस एंड त्रिकायी” – डॉ. महेश लोहड़ एवं टीम.
- “द सीक्रेट टाइम ऑफ कोड” – श्री अजय चतुर्वेदी.
- “म्यूज़ियोपैथी” – चित्तरवीणा एन. रविकिरण.
दिग्गज वक्ताओं का दृष्टिकोण
समारोह के उद्घाटन सत्र में शिक्षा मंत्रालय के आईकेएस (IKS) प्रभाग के राष्ट्रीय समन्वयक प्रोफेसर गंटी एस. मूर्ति ने आईआईटी मंडी की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान देश के प्रमुख केंद्रों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए चेतना अध्ययन में ऐतिहासिक योगदान दे रहा है.
निदेशक का वक्तव्य: आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मिधर बेहरा ने भारत के वैश्विक नेतृत्व पर बात करते हुए कहा, “भारत का ‘विश्वगुरु’ बनने का दृष्टिकोण केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, चेतना और मूल्य-आधारित समग्र विकास पर केंद्रित है.”
मुख्य अतिथि डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम ने भी संस्थान के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपराएं शिक्षा को केवल जानकारी का साधन नहीं, बल्कि मुक्ति और आंतरिक विकास का माध्यम मानती हैं, जिसे आईआईटी मंडी आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ आगे बढ़ा रहा है.
इस सम्मेलन में अमेरिका के प्रो. स्टुअर्ट हैमरॉफ, यूके के प्रो. दिमित्रिस ए. पिनोट्सिस सहित भारत की जानी-मानी आध्यात्मिक चिंतक बी.के. शिवानी, प्रो. सिसिर रॉय और डॉ. अनिरबन बंद्योपाध्याय जैसे वैश्विक विद्वानों ने हिस्सा लेकर भविष्य के लिए नए शोध मार्गों को प्रशस्त किया है.
