एसबीआई इकोरैप – आरबीआई के जून उपायों का उद्देश्य घरेलू ब्याज दरें बढ़ाए बिना विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करना और रुपये को समर्थन देना

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मुंबई : एसबीआई रिसर्च की नवीनतम इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जून 2026 में घोषित उपायों का उद्देश्य घरेलू ब्याज दरों में वृद्धि किए बिना विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करना और रुपये को मजबूती प्रदान करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी और जून 2026 के उपाय रुपये को स्थिर करने, घरेलू ऋण बाजार को गहरा बनाने, बाहरी वित्तपोषण को सुगम बनाने तथा स्थिर विदेशी पूंजी आकर्षित करने की समन्वित रणनीति का हिस्सा हैं। जहां फरवरी के उपाय संरचनात्मक सुधारों और बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) पर केंद्रित थे, वहीं जून के उपाय एफसीएनआर (बी) जमा और ईसीबी/ओएफसीबी स्वैप सुविधाओं के माध्यम से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए हैं।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इन विशेष व्यवस्थाओं के माध्यम से वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 55-65 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह हो सकता है, जिसमें 40-45 अरब डॉलर एफसीएनआर (बी) जमा तथा 15-20 अरब डॉलर ईसीबी/ओएफसीबी मार्ग से आने की संभावना है। इन प्रवाहों के कारण वित्त वर्ष 2027 में देश का भुगतान संतुलन (बीओपी) 5-10 अरब डॉलर के अधिशेष में पहुंच सकता है, जबकि पहले घाटे का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर 14.5-15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर कम होगा और ब्याज दरों में और नरमी की संभावना बनेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की आशंकाएं समयपूर्व हैं और मौद्रिक नीति से जुड़े निर्णय आंकड़ों पर आधारित होने चाहिए। साथ ही, आरबीआई को रुपये में अत्यधिक गिरावट को रोकने के लिए सक्रिय और निर्णायक हस्तक्षेप जारी रखना चाहिए, क्योंकि लगातार कमजोरी आयातित मुद्रास्फीति को बढ़ाने और व्यापक वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

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