भारत के श्रम बाजार में आया संरचनात्मक बदलाव: PLFS 2025 पर आधारित एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट

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मुंबई : एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने आज अपनी नवीनतम रिपोर्ट “हाउ इंडिया वर्क्स टुडे” जारी की। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025 के डेटा का विश्लेषण करते हुए यह रिपोर्ट भारत के रोजगार परिदृश्य में आ रहे बड़े बदलावों और युवा बेरोजगारी में भारी गिरावट को रेखांकित करती है।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं:

  • कृषि से इतर रोजगार में वृद्धि: भारत का कार्यबल अब खेती से हटकर अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। 37 वर्षों की अवधि में कृषि पर निर्भर कार्यबल 66% (1987-88) से गिरकर 43% (2023-24) पर आ गया है, जो 23% की गिरावट दर्शाता है।
  • बड़े उद्यमों और विनिर्माण का बढ़ता दबदबा: सरकार द्वारा विनिर्माण (Manufacturing) को दिए जा रहे बढ़ावा के कारण, बड़े उद्यमों (20 से अधिक कर्मचारी) में रोजगार की हिस्सेदारी 2024 के 10.8% से बढ़कर 13.7% हो गई है।
  • श्रम बल भागीदारी दर (LFPR): 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रम बल भागीदारी दर 2025 में 59.3% रही। पुरुषों की भागीदारी 79.1% और महिलाओं की भागीदारी 40.0% दर्ज की गई है।
  • युवा बेरोजगारी में कमी: 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में युवा बेरोजगारी दर 2025 में गिरकर 9.9% रह गई है, जो वैश्विक औसत और पिछले भारतीय आंकड़ों की तुलना में काफी कम है।
  • क्षेत्रीय प्रदर्शन: गुजरात (0.9%), मध्य प्रदेश (1.5%), और कर्नाटक (2.3%) जैसे राज्यों ने सबसे कम बेरोजगारी दर दर्ज की है, जो इन राज्यों में रोजगार सृजन की मजबूत क्षमता को दर्शाता है।
  • कौशल और वेतन का संबंध: रिपोर्ट के अनुसार, औपचारिक प्रशिक्षण का सीधा असर वेतन पर पड़ता है। स्वयं के खर्च पर प्रशिक्षण लेने से नियमित वेतन वाली नौकरी मिलने की संभावना 3% तक बढ़ जाती है।

डॉ. सौम्य कांति घोष, समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार, एसबीआई ने कहा: “नवीनतम PLFS डेटा पुष्टि करता है कि भारत एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। विनिर्माण और बड़े पैमाने के उद्यमों की ओर बढ़ता झुकाव और महिला श्रम भागीदारी में निरंतर वृद्धि एक परिपक्व होती अर्थव्यवस्था का संकेत है, जो विविध रोजगार के अवसर पैदा कर रही है।”

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