एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट: पिछले एक दशक में भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में हुआ अभूतपूर्व विस्तार और समावेशी विकास

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नई दिल्ली – वर्ष 2024 को समाप्त हुए दशक के दौरान भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक बुनियादी ढांचे के विस्तार, छात्रों के बढ़ते नामांकन और महिलाओं तथा वंचित वर्गों की बढ़ती भागीदारी के साथ एक ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है। एसबीआई रिसर्च (SBI Research) की नवीनतम रिपोर्ट, “2014 के बाद से भारत में उच्च शिक्षा की स्थिति” के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 (FY24) तक शैक्षणिक संस्थानों की कुल संख्या 32% की वृद्धि के साथ 64,756 पर पहुंच गई है, जिसमें 1,289 विश्वविद्यालय, 48,246 कॉलेज और 15,221 स्वायत्त/स्टैंडअलोन संस्थान शामिल हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अग्रणी राज्य देश के कुल कॉलेजों और स्टैंडअलोन संस्थानों के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। बुनियादी ढांचे के साथ-साथ, उच्च शिक्षा में कुल छात्र नामांकन 36% बढ़कर 4.5 करोड़ (450 लाख) तक पहुंच गया है, जिसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की हिस्सेदारी कुल नामांकन का 62% है।

रिपोर्ट में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर विशेष प्रकाश डाला गया है, जहां वित्त वर्ष 2014 की तुलना में महिला नामांकन 47% बढ़कर 2.2 करोड़ के स्तर को पार कर गया है। विज्ञान (Science) की स्नातक स्तर की पढ़ाई में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक हो गई है, जबकि कुल 3.4 लाख पीएच.डी. (Ph.D.) नामांकनों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग समान है। देश के प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (IIT, IIM और NIT) की संख्या में 27% और छात्र क्षमता में 50% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इन शीर्ष संस्थानों में महिलाओं की उपस्थिति में सुधार हुआ है; IIT और NIT में प्रत्येक 5 में से 1 छात्र महिला है, जबकि IIM के स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर लगभग एक-तिहाई (37.7%) हो गई है। इसके अलावा, इन प्रमुख संस्थानों में औसतन 93% प्लेसमेंट दर दर्ज की गई है, और औसत मध्यस्थ वेतन (Median Salary) वित्त वर्ष 2016 से 105% बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में ₹34.6 लाख हो गया है।

इस विकास यात्रा को बनाए रखने के लिए एसबीआई रिसर्च ने कई आवश्यक नीतिगत सुधारों की सिफारिश की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल बजट व्यय में उच्च शिक्षा का हिस्सा पिछले दो दशकों से लगभग 1.0% पर स्थिर बना हुआ है। इसके अलावा, केंद्रीय संस्थानों में संकाय (फैकल्टी) के 34% रिक्त पद, राज्यों के बीच छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) में असमानता, और सरकारी तथा निजी विश्वविद्यालयों के बीच फीस और परिणामों का अंतर प्रमुख चुनौतियाँ हैं। आगे की राह के रूप में, रिपोर्ट में व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) को 30.7% से तेजी से आगे बढ़ाने, और चीन की ‘गाओकाओ’ (Gaokao) परीक्षा की तर्ज पर राष्ट्रीय परीक्षाओं में गोपनीयता और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों के अधिकारों और पारदर्शिता की रक्षा के लिए, एसबीआई रिसर्च ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को संसद के अधिनियम द्वारा एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) बनाने, राज्य लोक सेवा आयोगों में सुधार करने और संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन करके “निःशुल्क एवं निष्पक्ष शिक्षा के अवसर के अधिकार” को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।

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