तहज़ीब या बदलती ज़िन्दगी का आईना
किसी चौराहे की लस्सी पर उमड़ती भीड़,छोले-भटूरे की लंबी कतारें…कहीं समोसे-कचौरी-चाट के ठेलों पर रौनक,तो कहीं रोज़ खुलते चिकन-मटन के…
किसी चौराहे की लस्सी पर उमड़ती भीड़,छोले-भटूरे की लंबी कतारें…कहीं समोसे-कचौरी-चाट के ठेलों पर रौनक,तो कहीं रोज़ खुलते चिकन-मटन के…