सदी की सबसे बड़ी बाढ़ ने चित्रकूट को न केवल बिखेर दिया, बल्कि एक संदेश भी दे गई… सीमाओं में रहो

Spread the love

चित्रकूट की ये बाढ़ तबाही तो लेकर आई, लोगो का नुकसान भी खूब किया, लेकिन कहीं और से खड़े होकर देखने की कोशिश करें तो आपको लगेगा की मां मंदाकिनी ने ये जल प्रलय अपना सब कुछ ठीक करने की कोशिश की है। भले एनजीटी प्रशासन को निर्देश देती हो कि 500 मीटर नदी क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं होगा लेकिन चित्रकूट में सुरसा कि तरह बेतहाशा निर्माण नदी तट पर होते जा रहे थे। पुण्य सलिला मंदाकिनी को टूरिस्ट रिवर बनाने की कवायद जोरो पर थी। नदी के अपने सलोने किनारो को ढंक कर सीमेंट की चादर बिछा दी है जिससे उनके अवैध महल बचे रहे। चित्रकूट के जल, जंगल और जमीन के सामूहिक स्वरूप वाली रमणीयता को खत्म कर धार्मिक पर्यटन विकसित किया जा रहा था। लिहाजा राम की कर्मस्थली में मंदाकिनी ने चित्रकूट को चित्रकूट रहने देने का कल संदेश दे दिया है। उसने अपने सीमाएँ खींच दी हैं। अपनी हद बता दी है।
करोड़ों खर्च करके यहां किए जा रहे निर्माण के कर्ता धर्ता को भी अब ये सोचना होगा कि उनकी कवायद बाढ़ के पानी में बहने के लिए तो नहीं है। बहरहाल जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था। सालों लग जायेगे इस नुकसान को पूरा करने में। सत्ता संस्थानों से अपेक्षा है कि नुकसान की भरपाई युद्ध स्तर पर की जाए, आवश्यक निर्माण पूरी ताकत से तत्काल किए जाएं। लेकिन ये भी उतनी संजीदगी के साथ किया जाए कि चित्रकूट में हद तो तय कर दी जाए…

admin1

admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *