भोपाल। भोपाल रियासत के आखिरी नवाब हमीद उल्लाह खां की संपत्ति खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी एवं खसरा क्रमांक 42 को कथित रूप से शत्रु संपत्ति घोषित किए जाने का विवाद अब महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार को न्यायालय सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के समक्ष हुई सुनवाई में प्रभावित पक्षकारों ने अपने स्वामित्व एवं कब्जे से संबंधित दस्तावेजों के साथ वैधानिक आपत्तियां प्रस्तुत कीं। मामले में प्रभावित रहवासियों की ओर से एडवोकेट जेड.यू. अल्वी और खालिद हफीज समेत अन्य वकील पैरवी कर रहे हैं। दो पक्षकारों की ओर से एडवोकेट जेड.यू. अल्वी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की प्रतियां एसडीएम कोर्ट में पेश की।
इसके साथ ही रियाज मंजिल का विवाद अब राजस्व स्तर की जांच तक सीमित न रहकर हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में पहुंच गया है। हाईकोर्ट में प्रभावित पक्षकारों के साथ केंद्र सरकार के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय तथा कलेक्टर एवं जिला प्रशासन को भी विवादित संपत्ति से संबंधित वास्तविक स्थिति और उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
घर बचाओ संघर्ष समिति के उप संयोजक एडवोकेट जगदीश छावानी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में पूर्व में नोटिसधारियों ने गंभीर आपत्ति उठाई है कि जिस रियाज मंजिल और खसरा नं. 42 को नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम से जोड़कर वर्ष 2024 के कथित प्रमाण-पत्र के आधार पर शत्रु संपत्ति बताया जा रहा है, उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि आफताब जहां के नाम दर्ज होना प्रदर्शित नहीं होती। आपत्तियों में इसका संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और उनके बाद मान्यता प्राप्त उत्तराधिकारी साजिदा सुल्तान से बताया गया है।
प्रभावित पक्षकारों ने 29 अप्रैल 2024 के कथित प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और उसके आधारभूत रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाते हुए CEPI मुंबई से मूल फाइल, नोटशीट, प्रमाणित प्रमाण-पत्र, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, जांच एवं सत्यापन रिपोर्ट तथा जिला प्रशासन से हुए पत्राचार को बुलाए जाने की मांग की है।
मंगलवार की कार्यवाही में हाईकोर्ट के आदेश सामने आने तथा अन्य प्रभावितों द्वारा दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत किए जाने के बाद सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं एसडीएम न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को नियत कर दी है।
अब इस बहुचर्चित मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रियाज मंजिल वास्तव में आफताब जहां बेगम की स्वामित्वगत संपत्ति थी और 29 अप्रैल 2024 का कथित शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र किन मूल सरकारी अभिलेखों के आधार पर जारी हुआ? हाईकोर्ट तक मामला पहुंचने के बाद इन सवालों का जवाब अब केवल शिकायत या दावों से नहीं, बल्कि मूल सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर देना होगा।
