मुंबई : क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की नई रिपोर्ट ‘शिफ्टिंग गियर्स 2026: क्रेडिट ड्राइव्स टुडेज़ मोबिलिटी’ के अनुसार, भारत में पैसेंजर व्हीकल (PV) और टू-व्हीलर लोन का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की पहली छमाही से 2026 की पहली छमाही के बीच पैसेंजर व्हीकल लोन की औसत रकम 49% बढ़कर ₹8.2 लाख हो गई है, जबकि इसे चुकाने की औसत अवधि 5 महीने बढ़कर 62 महीने पर पहुँच गई है। SUVs और एडवांस्ड फीचर्स वाली महंगी गाड़ियों के प्रति बढ़ते आकर्षण ने इस लोन साइज़ को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि टू-व्हीलर लोन अब केवल ‘पहली बार कर्ज लेने वालों’ (First-time borrowers) तक सीमित नहीं रह गया है। 2026 की पहली छमाही में टू-व्हीलर लोन लेने वाले 43% ग्राहक 2 साल से अधिक की क्रेडिट हिस्ट्री रखते थे (जो 2019 में 27% थी)। जून 2026 तक कुल बकाया टू-व्हीलर कर्ज ₹1.76 लाख करोड़ पहुँच गया है, जो 2019 की तुलना में 3.2 गुना अधिक है। साथ ही, एनबीएफसी (NBFCs) वाहन फाइनेंसिंग में अग्रणी बनी हुई हैं—जिनकी टू-व्हीलर लोन में 73% और पैसेंजर व्हीकल लोन में 37% हिस्सेदारी है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन के अनुसार, महंगी और प्रीमियम कारों के लिए लोन लेने वाले 51% ग्राहक अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण भारत से आ रहे हैं। छोटे शहरों में टू-व्हीलर से कार पर अपग्रेड करने वाले ग्रामीण उपभोक्ताओं के नए लोन 15% CAGR की रफ्तार से बढ़ रहे हैं, जो कुल ऑटो लोन की वृद्धि दर (8%) से लगभग दोगुनी है। इसके अलावा, 90 दिन से अधिक की डिफ़ॉल्ट किस्तों वाले कर्ज (90+ DPD) का अनुपात घटकर पैसेंजर व्हीकल में 0.5% और टू-व्हीलर में 1.4% रह गया है, जो लोन पोर्टफोलियो की मजबूत गुणवत्ता को दर्शाता है।
