वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय को ₹5.2 करोड़ का अनुसंधान अनुदान प्राप्त, पेटेंट एवं सामाजिक उपयोगिता आधारित नवाचारों से शोध उत्कृष्टता को मिली नई गति

Spread the love

सीहोर: 28 प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं के लिए ₹5.2 करोड़ से अधिक का बाह्य अनुसंधान अनुदान (external sponsored grants) अर्जित कर वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने अनुसंधान उत्कृष्टता एवं नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि कृषि, स्वास्थ्य सेवा, साइबर सुरक्षा, सतत विकास तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों से संबंधित वास्तविक चुनौतियों के समाधान के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है और उसे राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करती है।

अपने सशक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधार को निरंतर आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय के नवीन अनुसंधान-आधारित नवाचार जिनमें इन-बिल्ट पावर बैंक युक्त चार्जर, बहु-स्रोत हाइब्रिड पावर बैंक, ड्रॉप सुविधा से युक्त क्वाडकॉप्टर, बहुउद्देशीय डिटैचेबल बैकपैक तथा बहुउद्देशीय फ्लोर चेयर शामिल हैं। ये नवाचार दैनिक जीवन की उपयोगिता तथा सुगमता को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किए गए हैं। परिवहन एवं सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने उन्नत एयरबैग तैनाती प्रणाली, स्मार्ट वाहन आंतरिक प्रणाली, ट्रैफिक लेन प्राथमिकता प्रणाली, घुसपैठ पहचान प्रणाली, संरचनात्मक दरार पहचान प्रणाली तथा स्मार्ट उपकरण नियंत्रण प्रणाली जैसी प्रौद्योगिकियाँ विकसित की हैं। मजबूत अनुसंधान-से-व्यवहार रूपांतरण संस्कृति को दर्शाते हुए वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने छह डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन प्राप्त किए हैं, जबकि दस उपयोगिता पेटेंट आवेदन प्रकाशित हो चुके हैं और वर्तमान में परीक्षणाधीन हैं। ये उपलब्धियाँ विश्वविद्यालय के फैकल्टी मेंबर्स एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता तथा सतत नवाचार प्रयासों को रेखांकित करती हैं।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालय की अनेक शोध अनुदान-समर्थित परियोजनाएँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सटीक कृषि समाधान, रोग निगरानी प्रणालियों, साइबर सुरक्षा ढाँचों, संचार प्रौद्योगिकियों तथा एयरोस्पेस नवाचारों के विकास को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। कृषि क्षेत्र में अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य फसल उत्पादकता में वृद्धि, संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग, कीटनाशकों पर निर्भरता में कमी तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों के माध्यम से किसानों की आय एवं आजीविका में सुधार करना है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय रोग निगरानी, डेटा-आधारित स्वास्थ्य प्रशासन तथा उन्नत निदान तकनीकों पर केंद्रित परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है, जिनका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करना और स्वास्थ्य सेवाओं के परिणामों में सुधार लाना है। वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की अनुसंधान पहलें संचार प्रणालियों, एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों, अगली पीढ़ी की गतिशीलता, साइबर सुरक्षा तथा सार्वजनिक सुरक्षा के क्षेत्रों में प्रगति के माध्यम से भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी सशक्त बना रही हैं। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय उभरती हुई डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं डिजिटल प्रस्तुतीकरण की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

विश्वविद्यालय का अनुसंधान पोर्टफोलियो सतत विकास एवं उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र तक विस्तृत है। इस दिशा में विकसित नवाचारों में थर्मोप्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल वुड एडहेसिव तथा कृषि-औद्योगिक अवशेषों का उपयोग करते हुए आयरन ऑक्साइड नैनो पार्टिकल्स एवं सक्सिनिकएसिड के सह-उत्पादन हेतु एकीकृत जैव-प्रक्रिया शामिल हैं। ये नवाचार पर्यावरणीय संरक्षण एवं सामाजिक कल्याण दोनों के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। अनुसंधान को व्यावहारिक एवं समाजोपयोगी प्रौद्योगिकियों में रूपांतरित करते हुए वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय नवाचार, उद्यमिता तथा प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने वाली एक अनुसंधान-प्रधान संस्था के रूप में अपनी पहचान को और सुदृढ़ कर रहा है।

admin1

admin1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *