बिमटेक और हेक्सालॉग के बीच ऐतिहासिक समझौता: सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स में बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’; छात्रों को मिलेगा ₹1 लाख का स्टार्टअप सपोर्ट

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ग्रेटर नोएडा : बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) और हेक्सालॉग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ने सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में उद्योग-केंद्रित शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तीन साल के एक रणनीतिक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत बिमटेक कैंपस में एक अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित किया जाएगा।

यह केंद्र मुख्य रूप से एआई इन लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन एनालिटिक्स और डिजिटल फ्रेट मैनेजमेंट जैसे आधुनिक विषयों पर माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और सर्टिफिकेट प्रोग्राम संचालित करेगा। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें उद्योग की वास्तविक जटिलताओं और लाइव डेटाबेस के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।


साझेदारी की मुख्य विशेषताएं और छात्र लाभ:

  • एंटरप्रेन्योरशिप बूटकैंप: छात्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष बूटकैंप आयोजित किए जाएंगे, जहाँ वे वास्तविक निवेशकों के सामने अपने आइडिया पेश कर सकेंगे।
  • वित्तीय सहायता: बिमटेक की 12 शॉर्टलिस्टेड टीमों में से शीर्ष 5 टीमों का चयन हेक्सालॉग द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक चयनित टीम को अपने स्टार्टअप या लॉजिस्टिक्स आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए ₹1,00,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • इंडस्ट्री-एकेडेमिया कनेक्ट: दोनों संस्थान मिलकर ‘सप्लाई चेन फेस्ट’, हैकाथॉन, जॉइंट रिसर्च और केस डेवलपमेंट जैसी गतिविधियों का आयोजन करेंगे।

बिमटेक की डायरेक्टर डॉ. प्रबीना राजीब ने इस सहयोग को एक ‘मील का पत्थर’ बताते हुए कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन के डिजिटल होने के दौर में शैक्षणिक संस्थानों को पारंपरिक शिक्षण पद्धति से आगे निकलना होगा। हेक्सालॉग के सीईओ और बिमटेक के पूर्व छात्र दिब्यांशु त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, “लॉजिस्टिक्स के भविष्य के लीडर्स क्लासरूम में नहीं, बल्कि वास्तविक और अनसुलझी चुनौतियों के बीच तैयार होंगे।”

इस एमओयू साइनिंग समारोह में बिमटेक के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. पंकज प्रिया, डॉ. दानिश नासिर और हेक्सालॉग की सीनियर लीडरशिप मौजूद रही। यह पहल न केवल छात्रों के कौशल विकास में मदद करेगी, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को अधिक कुशल और डेटा-ड्रिवन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

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