मुंबई/नागौर : विविधीकृत जेएसडब्ल्यू समूह की कंपनी और पर्यावरण अनुकूल सीमेंट उत्पादक जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने आज उत्तर भारत के बाजार में अपनी पहली बड़ी मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपनी ने राजस्थान के नागौर जिले में स्थित अपने अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एकीकृत सीमेंट विनिर्माण संयंत्र में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
इस रणनीतिक विस्तार के साथ जेएसडब्ल्यू सीमेंट की कुल स्थापित ग्राइंडिंग क्षमता अब बढ़कर 24.1 एमटीपीए (MTPA) हो गई है।
नागौर संयंत्र: क्षमता और विशेषताएँ
यह नया संयंत्र राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचा बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- इकाइयां: इसमें 3.30 एमटीपीए की क्लिंकर इकाई और 2.50 एमटीपीए की सीमेंट ग्राइंडिंग इकाई चालू की गई है।
- विस्तार: 1.00 एमटीपीए की एक अतिरिक्त ग्राइंडिंग इकाई का निर्माण कार्य अभी जारी है।
- रिकॉर्ड समय: कंपनी ने इस पूरी तरह से एकीकृत इकाई को मात्र 21 महीनों के रिकॉर्ड समय में चालू कर अपनी परिचालन दक्षता का प्रदर्शन किया है।
आईपीओ फंड का सही इस्तेमाल और भविष्य के लक्ष्य
इस परियोजना के आंशिक वित्तपोषण के लिए कंपनी ने अपने हालिया आईपीओ (IPO) से प्राप्त राशि में से ₹800 करोड़ का आवंटन किया था।
जेएसडब्ल्यू सीमेंट के प्रबंध निदेशक, श्री पार्थ जिंदल ने इस अवसर पर कहा:
“नागौर फैक्टरी का शुरू होना जेएसडब्ल्यू सीमेंट को एक राष्ट्रीय दिग्गज बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। हम वित्त वर्ष 2029 तक 41.85 एमटीपीए की क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहे हैं। यह विस्तार उत्तर भारत की आर्थिक प्रगति में हमारा बड़ा योगदान होगा।”
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता (Sustainability)
नागौर संयंत्र को दुनिया की सबसे वहनीय (Sustainable) सीमेंट इकाइयों में से एक के रूप में तैयार किया गया है:
- वेस्ट हीट रिकवरी: जल्द ही यहाँ 16 मेगावाट का WHRS सिस्टम लगाया जाएगा, जो उत्सर्जन को कम कर बिजली पैदा करेगा।
- लॉजिस्टिक्स नवाचार: चूना पत्थर लाने के लिए 7 किलोमीटर लंबा ओवरलैंड बेल्ट कन्वेयर लगाया गया है, ताकि ट्रकों से होने वाले प्रदूषण और कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके।
- वैकल्पिक ईंधन: संयंत्र की भट्टी में पारंपरिक ईंधन के स्थान पर अन्य पर्यावरण अनुकूल ईंधनों के उपयोग की सुविधा है।
रणनीतिक महत्व
मुख्य कार्यकारी श्री नीलेश नर्वेकर के अनुसार, उत्तर भारत में बुनियादी ढांचे का विकास वर्तमान में देश में सबसे अधिक है। नागौर संयंत्र के माध्यम से जेएसडब्ल्यू सीमेंट न केवल अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाएगी, बल्कि 60 एमटीपीए की अपनी दीर्घकालिक विजन क्षमता के और भी करीब पहुँच जाएगी।
